पांच लाख रुपये रिश्वत के मामले में फंसी मनीमाजरा थाने की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर को सीबीआई के हाथों गिरफ्तार करवाने के बजाय यूटी पुलिस शांत बैठी है।
सूत्रों की मानें तो यूटी पुलिस ने जसविंदर कौर पर सही ढंग से कार्रवाई करने की बजाय पूरे केस से पल्ला झाड़ लिया है। इसी वजह से 15 दिनों से फरार जसविंदर कौर अब तक सीबीआई की पकड़ से दूर हैं। वहीं, यूटी पुलिस के उच्चाधिकारियों ने भी चुप्पी साध ली है। जसविंदर कौर की जिला अदालत से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब वह पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट जाने की तैयारी में हैं।
सीबीआई जसविंदर कौर की गिरफ्तारी के लिए अलर्ट हो गई है। सीबीआई ने यूटी एसएसपी को पत्र भेजकर जसविंदर कौर को जांच ज्वाइन करने के लिए रिमांडर भेजा था। इसके बावजूद जसविंदर कौर अब तक सेक्टर-30 स्थित सीबीआई दफ्तर नहीं पहुंची और न ही लाइनहाजिर होने के बाद ड्यूटी ज्वाइन किया। इसके चलते उच्चाधिकारियों ने जसविंदर कौर को सस्पेंड कर दिया था।
वहीं, दूसरी ओर जसविंदर कौर के बेटे ने कुछ समय पहले अपनी मां का पक्ष रखते हुए चंडीगढ़ सीबीआई को एक शिकायत भी दी थी। शिकायत में कहा गया था कि मां जसविंदर कौर को झूठा फंसाया गया है। हैरानी की बात है 15 दिनों से ज्यादा का समय बीतने के बावजूद जसविंदर कौर ने अब तक न ही सीबीआई की जांच ज्वाइन की और न ही गिरफ्तारी हो सकी है।
गौरतलब है कि सीबीआई को दी शिकायत में मनीमाजारा निवासी गुरदीप सिंह का आरोप था कि एसएचओ जसविंदर कौर ने उससे कहा कि रणधीर सिंह की पत्नी को सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर उससे 27 से 28 लाख की धोखाधड़ी हुई है। पैसे वापस कर दे नहीं तो उसके खिलाफ केस रजिस्टर्ड हो जाएगा।
इस दौरान केस को सेटलमेंट करने के एवज में पांच लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। इसके बाद बीते 19 जून को संगरूर के मेहलन चौक पर बिचौलिया भगवान सिंह को गुरदीप सिंह ने रिश्वत की पहली किस्त दो लाख रुपए दे दिए, जिसके बाद सीबीआई ने जाल बिछाकर आरोपी भगवान सिंह को एक लाख रुपये लेते गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।