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हाउसिंग स्कीम: एडवाइजर ने मंजूर किया प्रस्ताव, तो कर्मियों को 60 लाख में मिलेगा 98 लाख का फ्लैट

Thu, 27 Jun 2019 02:29 PM IST
खुशबू गोयल अनुभव अवस्थी, अमर उजाला, चंडीगढ़
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फाइल फोटो
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अगर एडवाइजर मनोज परीदा ने प्रस्ताव को मंजूरी दे दी तो इंप्लाइज को 98 लाख का फ्लैट 60 लाख में मिल सकता है। साल 2008 में वन बेड रूम फ्लैट की कीमत 13.53 लाख थी, जबकि वर्तमान में यह इंप्लाइज को 98 लाख में मिल रहा है। अगर कर्मचारियों की मुहिम रंग लाई तो यह फ्लैट कर्मचारियों को अधिकतम 60 लाख रुपये में मिल जाएंगे। इसके लिए प्रशासन को पार्क और रोड साइड की जमीन से इंप्लाइज को राहत देनी होगी। इसके लिए सांसद किरण खेर ने इंप्लाइज की मांग पर एडवाइजर मनोज परिदा से चर्चा की है।
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सूत्रों की मानें तो एडवाइजर के आते ही इंप्लाइज को बड़ी राहत मिल सकती है। जानकारों की मानें तो इंप्लाइज को राहत देने के लिए प्रशासन को दोबारा फाइल केंद्र को भेजनी पड़ेगी, यदि वहां से मंजूरी मिली तो कर्मचारियों को फ्लैट्स की कीमत में करीब 40 फीसदी की छूट मिल सकती है। हालांकि, इस प्रक्रिया को दोबारा पूरी होने में एक साल से अधिक का समय लग सकता है। हाउसिंग इंप्लाइज स्कीम के तहत कर्मचारियों के लिए वन रूम फ्लैट सिटी के सेक्टर-53, 56 में फ्लैट्स बनने हैं।

साल 2008 में इनकी कीमत 5.76 लाख तय थी, वर्तमान में कलेक्टर रेट के हिसाब से कर्मचारियों को यह फ्लैट्स 58 लाख में मिल रहे हैं। यदि पार्क और रोड साइड की जमीन में कर्मचारियों को राहत मिली तो वन रूम फ्लैट लगभग 35 लाख का पड़ेगा। वहीं, सेक्टर 53 में बनने वाले थ्री बेडरूम फ्लैट्स वर्तमान में कर्मचारियों को 1.76 करोड़ में मिल रहे हैं, जबकि पहले इनकी कीमत 34.70 लाख रुपये थी। यहां पर भी यदि प्रशासन की पहल रंग लाई तो यह फ्लैट्स कर्मचारियों को एक करोड़ के आसपास मिल जाएंगे।
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ऐसे मिलेगी यूटी इंप्लाइज को राहत

कर्मचारियों के लिए जो फ्लैट्स बनने हैं, उनके लिए सेक्टर -53, 56 में एकड़ के हिसाब से जमीन अलॉट की गई है। इस जमीन पर फ्लैट्स के साथ पार्क और रोड भी बननी है। कर्मचारियों ने मांग की है कि जितनी जमीन पर फ्लैट्स बन रहा है, उसी का रेट उनसे लिया जाए। पार्क और रोड में जितनी जमीन की खपत हो रही है। उससे उन्हें छूट दी जाए।

इंप्लाइज को दिलाई जाएगी राहत : खेर
यूटी प्रशासन में करीब 12 हजार कर्मचारी हैं। ऐसे में प्रशासन कर्मचारियों को नाराज नहीं करना चाहता है। यही वजह है कि इंप्लाइज के गुस्से को देखते हुए सांसद किरण खेर ने कहा कि उन्होंने एडवाइजर मनोज परिदा से इस संदर्भ में बात की है। वह चाहतीं हैं कि कर्मचारियों को रोड और पार्क साइड की जमीन के रेट देने में राहत दी जाए। सांसद का कहना है कि एडवाइजर अभी बाहर हैं, उनके आते ही इस मसले पर बात की जाएगी और कर्मचारियों जो भी राहत मिलती है, उन्हें दिलाया जाएगा।

ऐसे दोबारा शुरू हुई स्कीम
इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम के लिए 4 अक्तूबर 2010 को ड्रा हुआ था, जिसमें 7811 आवेदकों में से 3930 आवेदकों को पात्र पाया गया था। बता दें कि 2008 में गृह मंत्रालय ने यूटी प्रशासन की इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम को रद्द कर दिया था, लेकिन भाजपा सांसद किरण खेर के प्रयास से वर्षों से लटकी हाउसिंग स्कीम को हरी झंडी मिली थी। अब एक बार फिर खेर ने कर्मचारियों को राहत दिलवाने की पहल शुरू की है।
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ऐसे कम होंगे फ्लैट्स के रेट

सीएचबी के पास मौजूदा समय में 1167 एकड़ जमीन है। इसमें इंप्लाइज के फ्लैट्स के 67 एकड़ जमीन जमीन चाहिए। प्रशासन की ओर से सीएचबी को 74,131 रुपये गज के हिसाब से जमीन दी गई है। इस रेट पर कर्मचारियों को फ्लैट्स महंगे पड़ रहे हैं। सूत्रों की मानें तो यदि प्रशासन की ओर से पार्क और रोड साइड की जमीन से कर्मचारियों को राहत दे दी जाती है तो फ्लैट्स की कीमत 40 से 42 फीसदी तक कम हो जाएगी।

कर्मचारी भी यही हैं चाहते
कर्मचारी नेता डॉ. धर्मेंद्र का कहना है कि हम लोगों ने सांसद किरण खेर से पार्क और रोड साइड की जमीन से राहत दिलाने की मांग की है। उनका कहना है कि सांसद ने आश्वासन दिया है कि वह इस मसले पर प्रशासन से बात कर राहत दिलाने पर जोर देंगी। कर्मचारी नेता का कहना है कि हम लोग भी यही चाहते हैं।

ऐसी है इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम
बताते चलें कि साल 2008 में प्रशासन ने यूटी इंप्लाइज को सस्ते घर मुहैया कराने के लिए ‘इंप्लाइज हाउसिंग स्कीम’ बनाई थी। इस योजना का लाभ पाने के लिए उस समय 3930 इंप्लाइज चयनित हुए थे। 10 साल के लंबे इंतजार के बाद 2 जनवरी 2019 को यूटी इंप्लाइज के फ्लैट्स के लिए भूमि के आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी, लेकिन साल 2008 में जब स्कीम बनी थी, उस समय के हिसाब से अब फ्लैट्स की कीमत दस गुना से अधिक बढ़ गई, जिसके चलते कर्मचारियों ने फ्लैट्स लेने से हाथ खड़े कर दिए, क्योंकि इतनी अधिक कीमत चुकाना कर्मचारियों केलिए वर्तमान में मुमकिन नहीं है।
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