चंडीगढ़। चंडीगढ़ के सीवरेज से दूषित हो रही घग्गर नदी के मामले में चंडीगढ़ के पर्यावरण विभाग ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में अपना पक्ष रखा। प्रशासन ने बताया कि चंडीगढ़ अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहा है। इसके अलावा सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने की भी जानकारी दी है।
विभाग ने अपने जवाब में कहा है कि चंडीगढ़ में 54 एमजीडी (प्रतिदिन मिलियन गैलन) दूषित पानी होता है, जबकि चंडीगढ़ में जो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट काम कर रहे हैं, उनकी क्षमता 55.1 एमजीडी पानी को साफ करने की है। इसलिए चंडीगढ़ 100 फीसदी से भी ज्यादा काम कर रहा है। इसके अलावा चंडीगढ़ में मौजूद पांच सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने का काम चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शुरू कर दिया है।
इसके अलावा एनजीटी को पर्यावरण विभाग ने बताया कि शहर में चलने वाली सभी औद्योगिक इकाइयों की समय-समय पर जांच की जाती है। जो भी इकाई बिना ट्रीटमेंट प्लांट के चल रही हैं, उन्हें समय-समय पर नोटिस दिया जाता है। गौरतलब है कि घग्गर नदी को दूषित होने से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने चंडीगढ़, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश को दिसंबर 2019 में दिल्ली तलब किया था। एनजीटी ने राज्यों को यह निर्देश दिए थे कि महत्वपूर्ण घग्गर नदी को दूषित होने से बचाने के लिए अभी तक क्या-क्या कार्य राज्यों ने किए हैं, इससे संबंधित दस्तावेज लेकर आएं। सभी कार्यों की समीक्षा के बाद चंडीगढ़ को एनजीटी ने सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट को अपग्रेड करने के लिए निर्देश दिए थे। इसके अलावा भी कई आदेश जारी किए थे।