यूटी प्रशासन को चंडीगढ़ के सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों और मदरसों में वर्ष 2014-15 के लिए मिड डे मील सप्लाई करने के लिए निविदाओं का ता विज्ञापन केवल एक अखबार में प्रकाशित करना भारी पड़ रहा है।
हाईकोर्ट ने यूटी प्रशासन को दो और कंपनियों के नाम पर विचार करने का निर्देश दिया है जबकि निविदा दाताओं का इंटरव्यू वीरवार को हो चुका है।
गांधी विहार दिल्ली की मून लाइट और रोहिणी की मेट्रोपॉलिटन सोशल आर्ट एंड स्कूल सोसायटी एनजीओ ने एडवोकेट जगमोहन सिंह भट्टी केजरिए पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर की हैं।
याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी ने 22 मई को एक विज्ञापन प्रकाशित करके चंडीगढ़ के स्कूलों में वर्ष 2014-15 के लिए मिड डे मील सप्लाई के लिए निविदाएं मांगी थीं।
विज्ञापन के प्रकाशन का दायरा सीमित रखा गया और केवल एक अखबार में विज्ञापन प्रकाशित करवा कर निविदाएं मांग ली गईं, जबकि नियमानुसार कम से कम चार अखबारों में विज्ञापन प्रकाशित करवाना अनिवार्य है।
कंपनियों ने कहा कि उनकी कंपनियां देश में कई स्थानों पर स्कूलों में मिड डे मील सप्लाई करती हैं और मेट्रोपॉलिटन एनजीओ को तो दिल्ली के जिला शिक्षा अधिकारी से सर्टिफिकेट भी प्राप्त है, जबकि मून लाईट कंपनी को झज्जर के लॉरेंस स्कूल से सर्टिफिकेट मिला था।
कंपनियों ने याचिका में दावा किया कि वह उत्तम किस्म का मिड डे मील सप्लाई करती हैं, लेकिन निविदाओं का प्रकाशन केवल एक अखबार में होने के कारण वे आवेदन नहीं कर सकीं। कंपनियों नौ जून को याचिकाएं दायर कर दी थीं और इस बीच वीरवार को इंटरव्यू भी हो चुका है।
शुक्रवार को यह याचिकाएं जस्टिस महेश ग्रोवर की अगुवाई वाली बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए आईं और बेंच ने यूटी प्रशासन, शिक्षा सचिव, जिला शिक्षा अधिकारी आदि को निर्देश दिया कि वे इन कंपनियों के मांग पत्र पर विचार करें।
कंपनियों को तीन दिन में मांग पत्र सौंपने होंगे।उल्लेखनीय है कि पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूली बच्चों के लिए मिड डे मील योजना 1995 से शुरू हुई थी, उस वक्त बेकरी आदि सप्लाई की जाती थी, लेकिन वर्ष 2006 से पका हुआ ताजा खाना सप्लाई किया जाने लगा था। इन कंपनियों का दावा है कि वह वर्ष 2000 से ही इस स्कीम केतहत देश के कई स्कूलों में मिड डे मील सप्लाई करती आ रही हैं।