अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यूएस एंबेसी पोर्टल पर फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र अपलोड करने के आरोपी वीजा एजेंट को अग्रिम जमानत देने से इन्कार कर दिया। अदालत ने कहा कि हिरासत में पूछताछ इस मामले में आवश्यक है और अग्रिम जमानत कोई सामान्य अधिकार नहीं, बल्कि असाधारण राहत है।
इस मामले में एफआईआर यूएस एंबेसी के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेटर की शिकायत पर दर्ज की गई थी। आरोप है कि पंजाब में कुछ वीजा एजेंट यूएस एंबेसी पोर्टल पर फर्जी दस्तावेज अपलोड कर रहे थे। जनवरी 2025 में सह-आरोपी लवप्रीत सिंह ने नॉन-इमिग्रेंट वीज़ा आवेदन के लिए छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय से जारी बताई गई बीए डिग्री अपलोड की जिसे बाद में फर्जी माना गया। अभियोजन का कहना है कि ये फर्जी प्रमाणपत्र याचिकाकर्ता वीजा एजेंट ने ही उपलब्ध कराए थे।
हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी पर गंभीर और स्पष्ट आरोप हैं। फर्जी दस्तावेज़ नेटवर्क को उजागर करने के लिए उसकी हिरासत में पूछताछ जरूरी है। अग्रिम जमानत देने से जांच एजेंसी के अधिकार और मामले की गंभीरता प्रभावित हो सकती है। सुनवाई के दौरान पंजाब सरकार ने भी दलील दी कि इस प्रकार की धोखाधड़ी भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि पर असर डालती है और यूएस एंबेसी में भारतीयों की साख को नुकसान पहुंचा सकती है।