राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान जब मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष के बीच नोकझोंक नहीं रुकी तो विधानसभा अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही एक घंटे के लिए भोजनकाल तक स्थगित कर दी। लंच ब्रेक के बाद जब सदन की कार्यवाही शुरू हुई तो प्रताप बाजवा ने धन्यवाद प्रस्ताव पर आगे बोलने से पहले विधानसभा अध्यक्ष से कहा कि सदन के नेता (मुख्यमंत्री) ने उंगली उठा-उठाकर विपक्ष के सदस्यों को भ्रष्टाचारी बताते हुए जेल में डालने की धमकी दी है। सदन के नेता ने सदस्यों का चरित्र हनन किया है।
विपक्ष के लिए सदन में काम करना कठिन हो गया है। इसी दौरान विधायक सुखपाल खैरा भी बोल पड़े कि सदस्यों को सीधे तौर पर धमकाया जा रहा है। बाजवा ने स्पीकर से मांग की है कि सदन के नेता अपने शब्द वापस लें और माफी मांगें। स्पीकर ने उन्हें समझाने का प्रयास करते हुए बोलने को कहा लेकिन बाजवा अपनी मांग पर अड़ गए। इस दौरान मुख्यमंत्री सदन में मौजूद नहीं थे। बाजवा के साथ अन्य कांग्रेसी सदस्य अपनी मांग को लेकर वेल में पहुंच गए। माफी की मांग पर अड़े रहे। विवाद बढ़ता देख स्पीकर ने सदन की कार्यवाही फिर से आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी। दोपहर तीन बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर कांग्रेस सदस्य सदन में नहीं लौटे।
कुछ हुआ तो भगवंत मान पर कराएंगे एफआईआरः बाजवा
मुख्यमंत्री से माफी की मांग पर अड़े बाजवा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन के सदस्यों को धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को कुछ हो गया। किसी को कोई वाहन टक्कर मार दे या गोली मार दी गई तो मुख्यमंत्री भगवंत मान पर सीधे एफआईआर कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सीधे चेतावनी देकर गए हैं कि पकड़ कर जेल में डालेंगे। बाजवा ने कहा कि हमें कोई डर-खौफ नहीं है लेकिन यह कोई तरीका नहीं कि सदन के सदस्यों से ऐसा बर्ताव करें। बाजवा ने मुख्यमंत्री के व्यवहार को गलत बताते हुए कहा कि उन्हें सदन के सदस्यों का सम्मान करना चाहिए। बाजवा ने यह भी कहा कि वह सदन की कार्रवाई में शामिल होंगे या नहीं, इसका फैसला सात मार्च को करेंगे।