नम आंखें...शिथिल शरीर...बेबस लब। गम है ग्यारह साल की बेटी को खोने का और खुशी है बेटी की वजह से दो लोगों को नई जिंदगी मिलने का। तमरीन का अर्थ है मिठास और सुंदरता। छोटी सी तमरीन ने अपनी जिंदगी की मिठास दूसरों की जिंदगी में घोल दी। यही वजह है पिता युसूफ शाह कहते हैं हमारी तमरीन तो अभी जिंदा है उन दो जिंदगानियों में, जो उसकी किडनी से रोशन हो चुकी हैं।
तमरीन के पिता यूसूफ शाह 17 सितंबर को अपनी बेटी तमरीन के साथ चंडीगढ़ आए थे। चंडीगढ़ में एक बस स्टैंड के पास जब वे बस से उतरने लगे तो उनकी बेटी तमरीन चलती बस से गिर गई। इतने में पीछे से तेज रफ्तार में आ रही एक मिनी बस ने तमरीन को बुरी तरह रौंद डाला। तमरीन को पीजीआई में इलाज के लिए भर्ती क राया गया।
लेकिन 19 सितंबर को तमरीन को पीजीआई के डॉक्टरों ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया। एक मां-बाप के लिए यह बेहद ही भावुक क्षण था। फिर भी साहस, जिंदादिली और इंसानियत दिखाते हुए तमरीन के पिता यूसूफ शाह ने अपनी बेटी के अंगदान कर दो लोगों को नई जिंदगी देने का फैसला किया।