देश के रक्षा बलों को अत्याधुनिक हथियार से लैस बनाने के काम में जुटे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ ) के डायरेक्टर जनरल पद्मश्री डॉ. सतीश कुमार के अनुसार अगले 6 से 10 वर्षों में मिसाइलों का निर्माण पूर्णत: देश में ही होने लगेगा।
अभी इसका कुछ डिजाइनिंग पार्ट या इंजीनियरिंग पार्ट्स विदेशों से मंगाना पड़ता है। डीआरडीओ में अभी इस पर काम चल रहा है। वहीं, संगठन देश की युवा प्रतिभाओं को इससे जोड़ने के लिए टॉप के इंजीनियरिंग कॉलेजों में टेक्निकल सेंटर शुरू करेगा। यह जानकारी डा. सतीश कुमार ने एक खास बातचीत में दी।
डॉ. सतीश कुमार मंगलवार को पेक यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी (पेक) के एयरोस्पेस इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में आयोजित सम्मान समारोह में शिकरत करने पहुंचे थे। 1980 में पेक के स्टूडेंट रहे डॉ. सतीश कुमार ने मिसाइल एवं स्ट्रेटजिक सिस्टम में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
उनके अनुसार डीआरडीओ भविष्य में आने वाली टेक्नोलॉजी पर रिसर्च कर रहा है। इसके तहत कई प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है। हालांकि फिलहाल इसके बारे में उन्होंने कुछ खास जानकारी देने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में देश में ही निर्मित और डिजाइन मिसाइल बन सकेंगी। इसके पुर्जे भी पूर्ण रूप से देश में ही बनेंगे। यह पूर्ण उन्नत किस्म की मिसाइलें होंगी।