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अनट्रेंड अटेंडेंट, बिना वेरिफेकिशन के मिले ड्राइवर, 20 बसों के चालान काटे

Thu, 09 Mar 2017 09:35 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पंचकूला
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दो स्कूल की 20 बसों के काटे चालान - फोटो : अमर उजाला
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पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट द्वारा सुरक्षित स्कूल वाहन योजना को लेकर जारी की गाइडलाइंस पर स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट्स ने बुधवार को प्राइवेट स्कूलों पर सख्ती से कार्रवाई की। हाईकोर्ट के निर्देश पर कमीशन ने शहर के निजी स्कूलों का दौरा कर बसों की चेकिंग की। सुबह 6.30 बजे से लेकर शाम 4.30 बजे तक कमीशन के सदस्य प्राइवेट स्कूल बसों के चालान काटते नजर आए। इस विशेष अभियान में दिनभर में कुल 42 चालान किए। जबकि तीन प्राइवेट स्कूल बस को इंपाउंड किया गया।
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सुबह 10 बजे कमीशन के सदस्यों ने सेक्टर-6 स्थित हंसराज पब्लिक स्कूल और दोपहर 12 बजे सेक्टर-15 स्थित भवन विद्यालय स्कूल की बसों की चेकिंग की। चेकिंग में पाया गया कि स्कूल अथॉरिटी ने न तो बस ड्राइवर की पुलिस वेरिफिकेशन कराई गई थी। न तो अन्य जरूरी रिकॉर्ड रखे गए थे। कमीशन ने पाया कि स्कूल बसों में न तो फायर सेफ्टी उपकरण लगाए गए थे। न ही फर्स्ट एड बॉक्स में पर्याप्त मेडिसिन पाई गई। कमीशन के सदस्यों ने स्कूल बसों में खामियां पाए जाने पर चालान किए।

स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन आफ चाइल्ड राइट के सदस्य परमजीत सिंह बडोला ने बताया कि हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए यह चेकिंग की गई। हाईकोर्ट ने कमीशन को बुधवार शाम 5 बजे से पहले सुरक्षित स्कूल वाहन योजना को लेकर जारी की गई गाइडलाइंस पर शहर के प्राइवेट स्कूल बसों की स्टेटस रिपोर्ट सबमिट करने को कहा है। जिसे लेकर शहर के प्राइवेट स्कूल बसों की चेकिंग की गई। कमीशन के सदस्य परमजीत सिंह ने कहा कि स्पेशल चेकिंग में सामने आया है कि प्राइवेट स्कूल बसों में जीपीएस सिस्टम तो इंस्टाल कर दिए गए। लेकिन स्कूल के अंदर स्कूल बसों में लगाए गए जीपीएस मॉनिटरिंग को लेकर कोई सिस्टम इंस्टॉल नहीं किया गया। 
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बसों में ये सुविधा अनिवार्य

दो स्कूल की 20 बसों के काटे चालान - फोटो : अमर उजाला
कमीशन के सदस्यों ने औचक निरीक्षण की कार्रवाई के दौरान पाया कि कई प्राइवेट स्कूल बसें ऐसी हैं जिनको नियम और कायदों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा है। किसी स्कूली बस में सुरक्षा मानकों का ख्याल नहीं रखा गया है तो किसी में बस की क्षमता से ज्यादा बच्चे हैं। इतना ही नहीं, कई बसों में तो प्राथमिक उपचार के लिए स्कूल बसों में ट्रेंड अटेंडेंट और कंडक्टर तक नहीं हैं। 

कमीशन ने कहा कि जिले में चल रही 70 फीसदी स्कूल बसों में अटेंडेंट के पास फर्स्ट एड के सर्टिफिकेट्स तक नहीं है। कुछ स्कूल बसों में इमरजेंसी खिड़की तक नहीं है। स्कूल बसों में लगाए जाने वाले अटेंडेंट के पास प्राथमिक उपचार की ट्रेनिंग तक नहीं है। बिना ट्रेनिंग स्कूल बसों के अटेंडेंट काम कर रहे हैं। कई स्कूल बसों में तो फट एड के बॉक्स अपडेट नहीं किए जाते।

बसों में ये सुविधा अनिवार्य
कमीशन के सदस्य परमजीत सिंह बडोला ने कहा कि सुरक्षित स्कूल वाहन योजना के तहत हाईकोर्ट द्वारा जारी की  गाइडलाइंस के अनुसार स्कूल बस में सीसीटीवी कैमरा, फर्स्ट एड बॉक्स, महिला अटेंडेंट और बस ड्राइवर की पुलिस वेरिफिकेशन प्राथमिकता के साथ अनिवार्य है। इसके अलावा बसों की खिड़कियों में सेफ्टी राड्स, दरवाजे से सटी सीट पर सुरक्षित जाली या मेटेलिक कवर ताकि छोटे बच्चों के साथ बस में किसी तरह का हादसा न हो या वे फिसलकर नीचे न गिरें। बस में सीसीटीवी कैमरे जरूरी। दो इमरजेंसी गेट एक साइड पर और एक पीछे। प्राथमिक उपचार बॉक्स होना चाहिए।

आग बुझाओ यंत्र मौजूद हो। स्टोरेज रैक ऊपर के बजाय बच्चे की सीट के नीचे हो। बस के चारों इंडिकेटर चलते हों और बीप होना जरूरी। बस में छात्राएं हैं तो लेडी अटेंडेंट का अनिवार्य। बस में चढ़ने के दौरान स्टेप का साइज छह इंच होना चाहिए। कंडक्टर बहुत जरूरी और उसे पूरी ट्रेनिंग होना जरूरी। एक महीने की सीसीटीवी रिकार्डिंग का रिकार्ड होना जरूरी बसों का रंग पीला हो। गोल्डन ब्राउन रंग की पट्टी पर स्कूल का नाम लिखा होना चाहिए। बस पर डीटीओ का मोबाइल नंबर लिखा होना जरूरी।
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भवन विद्यालय स्कूल की बसों में खामियां

दो स्कूल की 20 बसों के काटे चालान
चेकिंग की टाइमलाइन
सुबह 6.30 बजे सेक्टर-11/15 चौक पर चेकिंग के दौरान 2 स्कूल बस इंपाउंड किए गए।
सुबह 8 बजे माजरी चौक  के पास चेकिंग के दौरान चालान किए गए।
सुबह 10 बजे सेक्टर-6 हंसराज पब्लिक स्कूल में चेकिंग के दौरान 8 चालान।
दोपहर 12 बजे सेक्टर-15 स्थित भवन विद्यालय स्कूल में चेकिंग के दौरान 12 चालान किए।
दोपहर 2 बजे सेक्टर-17/18 राउंड अबाउट पर चेकिंग।
दोपहर 3 बजे सेक्टर-3 ताउ देवीलाल स्टेडियम के पास चेकिंग।

हंसराज पब्लिक स्कूल में ये खामियां मिलीं
-बस ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन
- कई स्कूल बसों में महिला अटेंडेंट नहीं
-जीपीएस मॉनीटरिंग सिस्टम नहीं
- बस में लगाए गए कई फायर सेफ्टी उपकरण ठीक नहीं

भवन विद्यालय स्कूल की बसों में खामियां
-बस ड्राइवरों की पुलिस वेरिफिकेशन नहीं।
-बस में कंडक्टर और ट्रेंड महिला अटेंडेंट नहीं।
-स्कूल बस में लगाए कई फायर सेफ्टी उपकरण खराब।
-जीपीएस मॉनीटरिंग सिस्टम को लेकर स्कूल में कोई कंट्रोल रूम नहीं।
-फर्स्ट एड बॉक्स में पूरी दवाएं नहीं।
- कई बसों पर रूट नंबर तक दर्ज नहीं थे।
-कई ड्राइवरों के पास यूनिफार्म और नेम प्लेट नहीं थी
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