गंगाजल व बेलपत्र चढ़ाने से यमलोक का भय नहीं रहता। जल में काले तिल मिलाकर जल चढ़ाने से शनि व राहु का दोष समाप्त हो जाता है। गन्ने के रस द्वारा अभिषेक करने से लक्ष्मी की बढ़ोतरी होती है। चंदन व अक्षत चढ़ाने से महादेव भौतिक सुख साधन प्रदान करते हैं। दीपक अर्पित करने से ज्ञान की प्राप्ति होती है।
महाशिवरात्रि ये अवश्य करें
- दिन में उपवास करना चाहिए।
- ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ कपड़े धारण करें।
- प्रात: काल मंदिर में जाकर महादेव को गंगाजल, दूध, बेलपत्र, फूल, फला आदि अर्पित करने चाहिए।
- महाशिवरात्रि को दिन और रात दोनों समय ओम नम: शिवाय का जाप करना चाहिए।
- इस दिन व्रत करने वाले भक्त को अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए, केवल दूध और फल का आहार लें।
चार प्रहर की पूजा का महत्व और समय
ईश्वर चंद्र शास्त्री ने बताया कि महाशिवरात्रि का उपवास करने के साथ-साथ रात्रि में चार प्रहर की पूजा भी करनी चाहिए। इस पूजा की बड़ी भारी महिमा बताई गई है। चार प्रहर की पूजा में चार बार भगवान महादेव जी का शिवलिंग के रूप में अभिषेक किया जाता है। चार प्रहर की पूजा महाशिवरात्रि के व्रत के साथ जुड़ी हुई है।
शिव पुराण के अनुसार गुरुद्रुह नामक शिकारी से अनजाने में महाशिवरात्रि को शिवजी की चार प्रहर की पूजा हो गई और उस पूजा से प्रसन्न होकर महादेव जी ने उस शिकारी को साक्षात दर्शन दिए। तब से रात्रि में चार प्रहर की पूजा का विधान है। जो महाशिवरात्रि के दिन रात्रि में चार प्रहर की पूजा करते हैं भगवान उन पर प्रसन्न होते हैं।
चार पहर की पूजा का समय
प्रथम प्रहर की पूजा
- 1 मार्च, 2022
- शाम 6:21 मिनट से रात्रि 9:27 मिनट तक
द्वितीय प्रहर की पूजा
- 1 मार्च रात्रि 9:27 बजे से
- 12: 33 बजे तक
तृतीय प्रहर की पूजा
- 1 मार्च रात्रि 12:33 बजे से सुबह 3 :39 बजे तक
चतुर्थ प्रहर की पूजा
- 2 मार्च सुबह 3:39 बजे से 6:45 बजे तक।
- व्रत पारण का शुभ समय
- 2 मार्च प्रात: 06:58 बजे