मामूली सी तकरार और बात तलाक तक पहुंच गई। फिर जज ने दोनों को ऐसी बात समझाई कि प्यार उमड़ पड़ा और एक घर टूटते टूटते बस गया। कुछ समय पहले फेसबुक पर दोनों की दोस्ती हुई। दोस्ती धीरे-धीरे प्यार में बदल गई और फिर दोनों ने परिवारों की सहमति से प्रेम विवाह कर लिया। शादी के कुछ समय बाद दोनों में छोटी-छोटी बातों पर नोक झोंक होने लगी। पति को पत्नी की शॉपिंग, उसकी ड्रेसिंग सेंस पर आपत्ति थी। दोनों में खूब झगड़े होने लगे।
नतीजा यह हुआ कि दोनों ने अलग रहने के लिए जिला लोक अदालत में केस दायर किया। शनिवार को केस अदालत पहुंचा तो जज ने दोनों पक्षों को काफी गंभीरता से सुना। जज का कहना था कि उनके हिसाब से तलाक की कोई नौबत ही नहीं बनती है। जज ने दोनों को समझाया तो दोनों साथ रहने को राजी हो गए। इस दौरान कोर्ट रूम तालियों से गूंज उठा। वहीं, जज ने लड़की के भाई से कहा कि जैसे शादी के समय तुम अपनी बहन के साथ गए थे।
वैसे ही बहन को घर छोड़कर आओ। इस दौरान जजों ने दोनों परिवार को कैंटीन में चाय पिलाकर विदा किया। जजों का कहना था कि नई पीढ़ी में ईगो प्रॉब्लम के चलते ऐसी नौबत आती है। जिक्रयोग है लोक अदालत में आने वाले केसों में जो फैसला सुनाया जाता है। वह अंतिम फैसला होता है। क्योंकि फैसले पर दोनों पार्टियों की सहमति होती है। कोर्ट मामले में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं करती है।