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केंद्रीय राज्यमंत्री वीके सिंह ने कहा कि पंचशील संधि से देश को काफी नुकसान हुआ है

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चंडीगढ़। ‘पंचशील संधि पर हस्ताक्षर करके पंडित जवाहर लाल नेहरू अपने आप को दुनिया का सबसे शांतिप्रिय नेता बनाने की होड़ में लगे थे, जिसके चलते उन्होंने चीन की सभी बातें मान लीं। इस संधि से भारत को काफी नुकसान हुआ।’ यह बात पूर्व थलसेना अध्यक्ष और वर्तमान केंद्रीय राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह ने कही। वह चीन के मुद्दे पर प्रदेश भाजपा पदाधिकारियों के साथ बीते दिन वर्चुअल संवाद कर रहे थे। वीके सिंह ने केंद्र सरकार की योजनाओं व अन्य प्रयासों पर भी चर्चा की।
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वर्चुअल संवाद के दौरान वीके सिंह ने कहा कि वर्तमान में भारत-चीन संबंधों को समझने के लिए हमें अपने इतिहास के पन्नों को खंगालना होगा। दोनों देशों का संबंध हजारों साल पुराना है। वर्ष 1949 तक चीन हमारे लिए कोई चुनौती नहीं था। जब चीन ने तिब्बत पर कब्जा करने के लिए क्रूरता से वहां के लोगों को मारकर अपना अधिकार स्थापित किया तब तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू इस घटनाक्रम पर मूक बने रहे। उस समय सरदार वल्लभ भाई पटेल और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने इसका विरोध किया था और नेहरू को परामर्श दिया था कि उन्हें तिब्बत के लोगों की सहायता करनी चाहिए लेकिन वह नहीं माने। पंचशील संधि पर हस्ताक्षर कर वह खुद को दुनिया का सबसे शांतिप्रिय नेता बनाने की होड़ में लगे थे, जिसके चलते उन्होंने चीन की सभी बातों को मान लिया। इस संधि से भारत को काफी नुकसान हुआ।
जनरल वीके सिंह ने कहा कि काफी कुछ होने के बावजूद नेहरू का यह मानना था कि हमारे देश को किसी भी देश से कोई खतरा नहीं है, इसलिए हमारे देश को सेना की क्या जरूरत। उस समय की सेना को युद्ध की तैयारी करवाने की बजाय कई स्थानों पर मकान बनाने के काम पर लगा दिया। चीन की सेना युद्ध के लिए सदैव तैयार थी और हमारी सेना को न तो प्रशिक्षण, न हथियार और न ही साजोसामान प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान में प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर चीन के 59 मोबाइल एप बंद कर पहले डिजिटल स्ट्राइक की गई और अब चीन से सरकारी खरीदारी पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। हर तरफ से घेरकर चीन को कमजोर करने की रणनीति बनाई गई है। इस दौरान भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अरुण सूद, पूर्व प्रदेशाध्यक्ष राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य संजय टंडन, संगठन महामंत्री दिनेश कुमार, प्रदेश महामंत्री चंद्रशेखर, रामवीर भट्टी सहित सभी प्रदेश पदाधिकारियों, जिलों व मोर्चा के अध्यक्ष सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
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