उन्होंने कहा कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष अश्वनी शर्मा पर जानलेवा हमला करने वाले कौन हैं, इसकी पहचान होनी चाहिए। प्रदेश में कानून व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी पंजाब सरकार की है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेताओं और दफ्तरों पर हो रहे हमले साजिश हैं। इन हमलों के पीछे युवा कांग्रेस के नेताओं के हाथ हैं। पंजाब सरकार इसकी जांच करवाए।
पुरी ने कहा कि इन कानूनों की मांग खुद कांग्रेस द्वारा की गई थी। केंद्र में जब डॉ. मनमोहन सिंह की सरकार थी, तब इन कृषि सुधारों के बारे में डॉ. मनमोहन सिंह ने कहा था कि किसानों के पक्ष में इस प्रकार के फैसले करने का समय आ गया है। कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र और उनके नेताओं के बयान में जमीन आसमान का फर्क है।
कांग्रेस यदि इन कानूनों के विरोध में थी तो राज्यसभा में विरोध करना चाहिए था। प्रधानमंत्री ने कहा था कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करनी है। ये कानून इसी दिशा में लाए गए हैं। किसानों के लिए केंद्र के दरवाजे सदा खुले हैं। लोकतंत्र में विरोध करने का हक सभी को है लेकिन किसान कभी ट्रैक्टर नहीं जला सकते, हिंसा नहीं करते।
किसानों के साथ दोबारा बातचीत को तैयार
पुरी ने कहा कि वह किसानों के साथ आगामी कुछ दिनों में एक बार फिर बातचीत करने को तैयार हैं। उन्होंने भाजपा नेता राजिंदर मोहन सिंह छीना से कहा कि वह इस कानून की कापियों का पंजाबी में अनुवाद करवाकर किसानों में बांटें। पंजाब का मेहनती, पढ़ा-लिखा किसान विरोधियों की साजिश को बेनकाब कर देगा।