चंडीगढ़ के श्रमिक संगठनों ने इस बजट को लेकर नाखुशी जाहिर की है। उनका कहना है कि इस बजट से किसी को राहत नहीं मिलने वाली है। बल्कि इससे निजीकरण को बढ़ावा मिलेगा, महंगाई बढ़ेगी और रोजगार का कोई विकल्प नहीं है। इस बजट से सिर्फ लोगों को निराशा ही मिलेगी। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार कुछ बड़े निर्णय लिए जाएंगे जिससे कि आम लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन सब हवा हवाई निकला।
पेट्रोल-डीजल पर सेस से बढ़ेगी महंगाई
बजट में पेट्रोल-डीजल पर एक रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी और एक रुपये प्रति लीटर सेस बढ़ाया गया है। इससे माल ढुलाई व यात्री किराए पर असर पड़ेगा और आम आदमी की रोजमर्रा की जिंदगी में भी महंगाई बढ़ेगी। इसके साथ ही सोने के आयात सहित कुछ अन्य धातुओं पर भी एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है। वहीं आयातित किताबों और मुद्रण सामग्री पर भी एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। इससे सिर्फ महंगाई बढ़ेगी।
-कंवलजीत सिंह, सेक्रेटरी, सीपीआई, लिबरेशन
मध्यम वर्ग को कोई विशेष राहत नहीं
बजट में मध्यम वर्ग को भी कोई रियायत नहीं है। नौकरीपेशा तबका इस बात की उम्मीद कर रहा था कि 5 लाख तक की आय पर उसे पूर्ण टैक्स माफी मिले। अभी अगर पांच लाख से थोड़ी से भी इनकम बढ़ी तो फिर 2.5 लाख से ऊपर पूरा टैक्स देना होगा। सरकार ने इसमें कोई बदलाव नहीं किया। रियल इस्टेट के कारोबार को कुछ गति देने के उद्देश्य से 45 लाख तक के आवास ऋण में जरूर टैक्स छूट को 2 लाख से 3.5 लाख किया गया है।
-सतीश कुमार, सचिव, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियन
सार्वजनिक क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ाने वाला बजट
सरकार ने बजट में एयर इंडिया सहित अन्य कंपनियों में विनिवेश की दीर्घकालिक योजना की घोषणा की है। रेलवे में 50 हजार करोड़ के विनिवेश की घोषणा की है। बीमा क्षेत्र की कंपनियों में भी 100 फीसदी विदेशी निवेश की घोषणा की है। इस तरह यह बजट सरकारी व सार्वजनिक क्षेत्र के निजीकरण को और भी तेज गति देने वाला है। एक देश एक पावर ग्रिड और पानी व गैस के लिए भी एक अलग ग्रिड बनाने की मोदी सरकार की घोषणा बिजली, पानी और गैस पर भविष्य में पूरी तरह से कार्पोरेट कंपनियों के नियंत्रण के लिए रास्ता खोलने के अलावा और कुछ नहीं है।
-जीवराज, कंसल्टेंट लेबर लॉ
बेरोजगारी और असमानता को बढ़ाने वाला बजट
बजट श्रम कानूनों में बदलाव लाने की बात करता है ताकि उससे मजदूरों की संगठित होने और पूंजीपतियों से मोलभाव की उनकी ताकत को कम किया जा सके। बजट में नए रोजगार सृजन के बारे में एक शब्द भी नहीं है। न्यूनतम मजदूरी में बढ़ोत्तरी, ग्रामीण रोजगार के लिए मनरेगा के बजट में बढ़ोत्तरी और सामाजिक सुरक्षा के सवाल पर बजट में कुछ नहीं है। यह बजट बेरोजगारी, असमानता को बढ़ाने वाला है। मजदूरों, असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पूर्णत: निराशाजनक है।
-सुदामा, अध्यक्ष, चंडीगढ़ लेबर यूनियन
किसानों के साथ धोखा
बजट में किसानों के लिए कुछ भी नहीं है। खेती के कार्पोरेटीकरण और 85 प्रतिशत बीज बाजार पर बहुराष्ट्रीय निगमों का कब्जा हो जाने बाद बजट में मोदी सरकार का जीरो प्रतिशत लागत खेती का नारा केवल जुमला निकला। किसानों के 10 हजार उत्पादक समूहों का गठन करने की मोदी सरकार की घोषणा भी किसानों के साथ मात्र छलावा है। सरकार का 1592 विकास खंडों में जल शक्ति अभियान और 2022 तक हर घर में जल जीवन के तहत स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने की घोषणा भी हवाहवाई है।
-ईशा अरोड़ा, मेंबर कंस्ट्रक्शन वर्कर वेलफेयर बोर्ड