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Chandigarh News: यूनेस्को की विरासत दीवार, मंजूरियों के फेर में अटका हाईकोर्ट विस्तार

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चंडीगढ़। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के प्रस्तावित बुनियादी ढांचा विस्तार और समग्र विकास की योजना एक कदम आगे तो बढ़ी है लेकिन यूनेस्को द्वारा संरक्षित विरासत क्षेत्र की सख्त शर्तों ने इसकी रफ्तार थाम दी है। ऐतिहासिक परिसर में किसी भी प्रकार के निर्माण से पहले हेरिटेज इम्पैक्ट असेसमेंट रिपोर्ट अनिवार्य होने के कारण अब सभी पक्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर से मिलने वाली मंजूरी का इंतजार कर रहे हैं।
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शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि नियुक्त कंसल्टेंट ने हेरिटेज इम्पैक्ट रिपोर्ट पर काम शुरू कर दिया है, जिसे यूनेस्को के मानकों के अनुरूप तैयार किया जा रहा है। हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने भरोसा दिलाया कि रिपोर्ट जल्द अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाएगी। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने कहा कि केंद्र स्तर पर जरूरी सभी औपचारिकताएं समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी। उन्होंने सुझाव दिया कि कंसल्टेंट सीधे यूनेस्को से समन्वय स्थापित करे, जिससे प्रक्रिया में तेजी लाई जा सके। इस पर मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि पेरिस स्थित फाउंडेशन ले कॉर्बुजिए अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता, इसलिए इस मामले में धैर्य रखना होगा।
इसी बीच परिसर में सार्वजनिक शौचालयों की समस्या को देखते हुए 10 कंटेनर आधारित स्मार्ट बायो-टॉयलेट लगाने का प्रस्ताव अदालत के समक्ष रखा गया। 49 लाख रुपये की इस परियोजना में अत्याधुनिक तकनीक से लैस भूमिगत शौचालय होंगे। अस्थायी व्यवस्था शुरू कर दी गई है, जबकि शेष के लिए 28 जनवरी को टेंडर खोले जाएंगे।
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सुनवाई के दौरान कच्ची पार्किंग से हाईकोर्ट भवन तक प्रस्तावित ढके हुए मार्ग का मुद्दा भी उठा। यूनेस्को की पाबंदियों के चलते भवन के पास निर्माण संभव नहीं है। स्थान बदलने से नई व्यावहारिक दिक्कतें सामने आई हैं। खंडपीठ ने चंडीगढ़ प्रशासन को अगली सुनवाई में इस पर स्पष्ट रुख रखने के निर्देश दिए।
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