चंडीगढ़। इस बार रिकॉर्ड गर्मी के बावजूद शहर में बिजली की अधिकतम मांग पिछले वर्ष के मुकाबले चार मेगावॉट कम रही लेकिन पुराने बिजली वितरण ढांचे के कारण उपभोक्ताओं को 10 से 20 मिनट तक के अघोषित बिजली कट झेलने पड़े। शहर के विभिन्न सब-डिवीजनों ने ट्रांसफार्मरों और लाइनों पर बढ़ते लोड को कम करने के लिए बीच-बीच में बिजली आपूर्ति रोकी जिससे खासकर गांवों, कॉलोनियों, ईडब्ल्यूएस हाउसिंग और सरकारी आवासों में रहने वाले लोगों को परेशानी हुई। कई स्थानों पर सुबह पानी की आपूर्ति भी प्रभावित हुई।
अब मानसून में भी बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका जताई जा रही है। पुराने 11 केवी सब-स्टेशनों के ट्रांसफार्मरों की ओवरहालिंग पूरी नहीं हो सकी है जबकि 66 केवी भूमिगत केबलों के जोड़ों में नमी आने से फॉल्ट की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि सीपीडीएल का दावा है कि मानसून के लिए सभी सब-स्टेशनों को तैयार किया जा रहा है और वॉटरप्रूफ सीलिंग का काम जारी है।
शहर में बिजली की कमी नहीं है। सीपीडीएल के पास 550 मेगावॉट बिजली उपलब्ध है लेकिन पुराना वितरण नेटवर्क और केवल 15 प्रतिशत उपभोक्ताओं की ओर से बिजली लोड अपग्रेड कराने के कारण लाइनें ओवरलोड हो रही हैं। सीपीडीएल ने उपभोक्ताओं से वास्तविक खपत के अनुसार बिजली लोड अपडेट कराने की अपील की है। जून में शहर की अधिकतम बिजली मांग 461 मेगावॉट रही जबकि पिछले वर्ष यह 465 मेगावॉट दर्ज की गई थी।