हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में आने वाले प्रत्येक मरीज का एक यूनिक आईडेंटीफिकेशन नंबर होगा। एक बार पंजीकृत होने के बाद मरीज का पूरी जिंदगी इसीनंबर पर इलाज होगा।
जिसका पूरा ब्योरा स्वास्थ्य विभाग के पास होगा। एक बार जो व्यक्ति अस्पताल में आकर पंजीकृत हो गया, उसे दोबारा पंजीकरण करवाने के लिए लंबी लाइन में नहीं लगना पड़ेगा।
मरीज राज्य के किसी भी अस्पताल या पीएचसी में पंजीकरण करवाए, वह हरियाणा के किसी भी सरकारी संस्थान और मेडिकल कालेज में इलाज करवा सकेगा।
यदि मरीज किसी पीएचसी में भी पंजीकरण करवाता है तो वह किसी भी मेडिकल कालेज की ओपीडी में जाकर इलाज करवा सकेगा। मरीज को ओपीडी में थोड़ा बहुत विलंब हो सकता है, लेकिन रजिस्ट्रेशन में नहीं होगा। इसके अलावा मरीज स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं से इंटरलिंक हो जाएगा।
मसलन यदि कोई बच्चा राज्य के किसी सरकारी अस्पताल में जन्म लेता है तो पैदा होते ही उसका पंजीकरण हो जाएगा। यह यूआईडी नंबर हमेशा के लिए होगा। जिससे उस बच्चे का पूरा रिकार्ड अस्पताल में होगा।
स्वास्थ्य विभाग की सभी सेवाओं से वह इंटरलिंक हो जाएगा। भविष्य में जब भी वह बच्चा इलाज के लिए किसी भी अस्पताल में जाएगा तो उसके यूआईडी से यह जाना जा सकेगा कि उसे पहले कौनसी बीमारी थी, कितना टीका करण हुआ है। कैसे इलाज हुआ, क्या दवाएं दी गई हैं।
स्वास्थ्य विभाग का पहला चरण मार्च 2015 तक पूरा होगा। जिसमें पंचकूला गर्वनमेंट अस्पताल, कालका सीएचसी, पीजीआई रोहतक और राज्य की कोई एक पीएचसी शामिल होगी।
जिसके बाद दूसरे चरण में मेवात, सोनीपत मेडिकल कालेज, छह जिला अस्पताल, नौ पीएचसी और एक सीएचसी शामिल होंगी। तीसरे चरण में सभी अस्पताल और मेडिकल कालेज शामिल हो जाएंगे।
प्रोजेक्ट बड़ा है, इसे कई चरणों में करेंगे। टेंडर निकाल दिए गए हैं। हम तीन साल का टारगेट लेकर चल रहे हैं।
डा. एनके अरोड़ा, महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं