चंडीगढ़। कोरोना का असर सामान्य जनजीवन के साथ ही छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। स्नातक व परास्नातक की परीक्षाओं को लेकर अभी तक न तो यूजीसी ठोस निर्णय ले पाई है और न ही विश्वविद्यालय। कुछ विश्वविद्यालय अपने स्तर से छात्रों को प्रमोट करने की योजना बना रहे हैं लेकिन यह इतना आसान नहीं है। छात्रों को प्रमोट करने से पहले उन्हें छात्रों को प्रमोट करने का अपना आधार यूजीसी को बताना होगा। वह बताएंगे कि किस आधार पर छात्रों को पास किया जा रहा है क्योंकि एक गलत निर्णय से छात्रों का भविष्य खराब हो सकता है। साथ ही विश्वविद्यालयों पर भी कार्रवाई हो सकती है।
सूत्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय परीक्षा कराने के मूड में नहीं है और छात्रों को प्रमोट करने की योजना बन रही है। ऐसा करने से पहले विश्वविद्यालय को अपने स्तर पर बताना होगा कि वे प्रमोट के लिए किसे आधार मान रहे हैं क्योंकि हर विश्वविद्यालय में स्थितियां अलग-अलग होंगी।
विश्वविद्यालय खुद लेंगे निर्णय, लेकिन गलत निर्णय नहीं ले सकेंगे
जानकारी के अनुसार देश के कुछ विश्वविद्यालयों ने छात्रों को प्रमोट कर दिया लेकिन उन पर सवाल खड़े हो गए हैं। छात्रों ने भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के आरोप लगाए तो यूजीसी ने इस प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अपने स्तर पर निर्णय ले सकते हैं लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वे छात्रों के भविष्य की ओर ध्यान न दें।