9 अगस्त 2019 को सेक्टर 45/46 चौक पर रेड लाइट जंप करने पर कार सवार जम्मू-कश्मीर निवासी व्यक्ति से 500 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में हेड कांस्टेबल दलजीत सिंह और कांस्टेबल विकास को बर्खास्त कर दिया गया है। यह फैसला ट्रैफिक डीआईजी शशांक आनंद के आदेश पर हुआ है।
19 अगस्त 2019 को ट्वीटर पर ट्रैफिक डीआईजी शशांक आनंद को दी शिकायत में राकेश गुप्ता ने बताया था कि वह मूलरूप से जम्मू-कश्मीर के निवासी हैं और बीते 9 अगस्त को सोलन से लौटते समय वह कार से चंडीगढ़ के रास्ते अपने घर लौट रहे थे। इस दौरान सेक्टर 45/46 चौक पर पहुंचे तो रेड लाइट जंप करने की बात कहकर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों ने उनकी कार रुकवा ली।
आरोप था कि 5,000 रुपये का जुर्माना और उनका ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित कर देने कि बात कहकर हेड कांस्टेबल ने उन्हें सड़क के किनारे जाने और कांस्टेबल से बात करने को कहा। इसके बाद उनसे कहा गया कि उन्हें जुर्माना भरने के लिए जिला न्यायालयों के चक्कर काटने पड़ेंगे।
जम्मू-कश्मीर में रहने की वजह से उन्हें लगा कि जुर्माने का भुगतान करने के लिए चंडीगढ़ आना-जाना पड़ेगा इसलिए पुलिस को 500 रुपये दे दिया, जिसके बाद दोनों पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से जाने दिया। उन्होंने यह भी बताया कि इतने दिन बाद चंडीगढ़ ट्रैफिक पुलिस से वह इसलिए संपर्क नहीं कर सके क्योंकि जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट काम नहीं कर रहा था।
वाई-फाई की सुविधा मिलने पर उन्होंने यूटी पुलिस को मामले की जानकारी दी है। मामला संज्ञान में आते ही 20 अगस्त 2019 को दोनों पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर केस की जांच डीएसपी हरजीत कौर और उदयपाल को सौंप दिया गया था। इसके बाद ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों ने राकेश को ईमेल पर शिकायत भेजने के लिए कहा था, जिसके बाद जांच शुरू की गई थी। अब जांच पूरी होने पर दोनों को बर्खास्त कर दिया गया है।
आरोपी पुलिसकर्मियों ने आरोप को बताया बेबुनियाद
वहीं बर्खास्त हुए हेड कांस्टेबल दलजीत और कांस्टेबल विकास का कहना है कि उनके ऊपर लगे आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद हैं। उन्हें झूठा फंसाया जा रहा है, उन्हें तो यह भी नहीं पता कि राकेश गुप्ता कौन है और वह किस कार में सवार थे। बता दें कि ट्रैफिक पुलिस पहले भी लाइट प्वाइंट पर रिश्वत लेने के मामले में कई पुलिसकर्मियों को बर्खास्त कर चुकी है।