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रक्षाबंधन पर उजड़ गई दो बहनों की खुशियां, इकलौते भाई के बारे में मिली ऐसी खबर, सुनकर दोनों बेहोश

Mon, 27 Aug 2018 04:49 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रतिया(हरियाणा)
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रक्षाबंधन पर दो बहनों की खुशियों को ऐसा ग्रहण लगा कि जिंदगी तबाह हो गई। उन्हें इकलौते भाई के बारे ऐसी जानकारी मिली, सुनकर दोनों बेहोश हो गई, कोहराम मच गया। घटना हरियाणा के फतेहाबाद की है। रतिया में रविवार को अपनी बहनों से राखी बंधवाकर लालवास से रतिया आ रहे युवक की कार असंतुलित होकर पेड़ से टकरा गई।
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हादसा इतना भयानक था कि कार बुरी तरह से पिचक गई और कार में सवार युवक की मौत हो गई। मृतक अपनी बहनों का इकलौता भाई था। वह रतिया जाते समय बहनों को बढ़िया उपहार लाकर देने की बात कहकर गया था। जैसे ही उसकी बहनों के पास यह समाचार पहुंचा तो वह बेहोश होकर गिर गई। जैसे ही उसका शव गांव में पहुंचा तो पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। ग्रामीण उसके घर में पहुंचकर उसके परिवार वालों को ढाढ़स बंधाते देखे गए।

 
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पिता संतों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं

कार एक्सीडेंट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लालवास निवासी 22 वर्षीय कैलाश पुत्र रामसिंह बिश्नोई परिवार का इकलौता चिराग था। कैलाश रविवार सुबह अपनी दो बहनों से राखी बंधवाने के बाद कार में सवार होकर रतिया किसी काम से आ रहा था। बताया गया है कि रास्ते में होली विजडम स्कूल के पास अचानक उसकी कार असंतुलित होकर सड़क से उतरकर पेड़ से जा टकराई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, धमाका सुनकर आसपास की ढाणियों में रह रहे लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचित करके कैलाश को कार से बाहर निकाला। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे रतिया के नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

समाचार सुनकर बेहोश हो गई बहनें
जिस रक्षाबंधन के दिन अपने भाई की सलामती के लिए उसे राखी बांधकर रतिया के लिए रवाना किया था, उन बहनों का भाई काल का शिकार हो गया। गांव से रवाना होने से पहले वह बहनों को यह भी कहकर गया था कि रतिया से वह उनके लिए बढ़िया उपहार लेकर आएगा, लेकिन शायद काल को कुछ और ही मंजूर था। कैलाश की मौत का समाचार जैसे ही उसके घर पर पहुंचा तो परिजनों पर जैसे भारी संकट आ गिरा हो।

उसके शव को जब घर लाया गया तो कैलाश की दोनों बहनें व उसकी मां बेहोश होकर गिर गई। महिलाओं का क्रंदन गांव में हर आंख में आंसू लेकर आ रहा था। पूरा गांव इस हादसे के बाद सन्न था। कैलाश के पिता राम सिंह  कुछ समय पहले घर बार को छोड़कर मुकाम धाम में जाकर संतों का जीवन व्यतीत कर रहे हैं। पीछे से पूरे परिवार की जिम्मेवारी कैलाश पर थी और वही अपनी बहनों व मां की देखभाल कर रहा था।
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