अदालत के आदेश पर सीबीआई ने 28 फरवरी 1997 में थाना मेहता के एसएचओ राजिंदर सिंह, अतिरिक्त एसएचओ किशन सिंह व एसआई तरसेम लाल पर हत्या समेत कई धारओं के तहत केस दर्ज किया।
पिता ने कहा था- हमें तो अखबार से पता चला कि बेटा मार दिया गया
साहिब सिंह के पिता काहन सिंह ने बयान दर्ज कराया था कि 1989 में उनका बेटा घर से चला गया था। वह दिल्ली में ट्रक ड्राइवरी करता था। उन्हें अखबार से पता चला था कि साहिब सिंह को 14 सितंबर 1992 को पुलिस मुठभेड़ में तीन और लोगों के साथ मार दिया गया। वह जब अन्य ग्रामीणों के साथ पुलिस स्टेशन गए तो मुंशी ने उन्हें बताया कि वे पहले ही साहिब सिंह का अंतिम संस्कार कर चुके हैं। इसके बाद वे वहां से उसकी अस्थियां लेकर आए।
पहले पिता और अब भाई लड़ रहा है जंग
मृतक साहिब के पिता ने इस मामले में दोषी पुलिस अधिकारियों को सजा दिलाने के लिए लंबा संघर्ष किया। इस बीच उनकी मौत हो गई। इसके बाद मृतक का भाई सरताज इस केस को लड़ रहा है। उनका कहना है कि वह तो इंसाफ चाहते हैं और उन्हें देश की न्याय व्यवस्था पर विश्वास है।