फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डेरे में बनाए जाते हैं नपुंसक, दो पीड़़ितों ने बयां की घिनौनी कहानी 

Thu, 31 Aug 2017 09:34 AM IST
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
विज्ञापन
राम रहीम - फोटो : SELF
विज्ञापन
डेरा प्रमुख राम रहीम की परत दर परत काली करतूतें खुलती जा रही हैं। एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। राम रहीम पर आरोप है कि डेरे में लोगों को नपुंसक बनाया जाता है
विज्ञापन


लायर्स फार ह्यूमन राइट्स इंटरनेशनल (एलएफएचआई) ने उन लोगों को निशुल्क कानूनी मदद की पेशकश की है, जो डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत रामरहीम के करतूतों से पीड़ित हैं। एलएफएचआई के एडवोकेट नवकिरण सिंह ने ऐसे सभी पीड़ितों से सामने आने की अपील की है, जो डेरामुखी के भय से अब तक मुंह खोलने से डर रहे थे।

प्रेस क्लब में बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में एडवोकेट नवकिरण के साथ फतेहाबाद निवासी पूर्व डेरा अनुयायी हंसराज मौजूद थे, उन्होंने नवकिरण के जरिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर डेरामुखी पर अनुयायियों को नपुंसक बनाने के आरोप लगाए थे। हाईकोर्ट ने इस याचिका पर जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपा हुआ है। 
विज्ञापन


याची ने जुलाई, 2012 में हाईकोर्ट में कुल 400 अनुयायियों की सूची सौंपते हुए उनमें से 166 को नपुंसक बनाने का आरोप लगाया था। याची का कहना था कि डेरामुखी ने यह कहते हुए अनुयायियों को नपुंसक बनाया कि वे अगर खुद नपुंसक बनते हैं तो भगवान को पाने में सफल होंगे।

नवकिरण ने बताया कि सीबीआई मामले में आगामी अक्तूबर माह में हाईकोर्ट में फाइनल रिपोर्ट दाखिल कर सकती है। इस मौके पर हंसराज ने बताया कि उसके माता-पिता डेरे के अनुयायी थे, इसलिए वह भी साल 1996 में 17 साल की उम्र में डेरे के अनुयायी बन गए थे। 
विज्ञापन

ram rahim
बताया कि मुझे साल 2002 में श्री गंगानगर स्थित डेरे के अस्पताल में नपुंसक बनने के लिए मजबूर किया गया, जहां मेरे अलावा कई अन्य साधू (डेरा अनुयायी) भी थे। इसके लिए डेरामुखी ने मेरी सराहना की और मुझे एक नया गिटार दिया, क्योंकि उस समय मैं डेरे के म्यूजिक ग्रुप का सदस्य था। कुछ दिन बाद में मैंने महसूस किया कि नपुंसक बनाना एक अमानवीय कृत्य था, जिसके कारण मेरे शरीर में कई तरह के परिवर्तन होने लगे। मैंने तब डेरा छोड़ दिया। 

नपुंसक बनाए गए अनुयायियों के नाम पर ट्रांसफर कराई गईं दान में मिलीं जमीनें
हंसराज ने बताया कि कुछ वर्षों बाद वह एक अन्य डेरा अनुयायी गुरदास सिंह तूर के संपर्क में आया। उन्होंने नपुंसक बनाए गए डेरा प्रेमियों की सूची तैयार की। हंसराज ने बताया कि डेरामुखी का मानना था कि नपुंसक बनने के बाद अनुयायी डेरा छोड़कर नहीं जा सकेंगे। डेरामुखी ऐसे अनुयायियों से खाली कागज पर दस्तखत भी करवा लेता था। 

उसके बाद उनके नामों पर डेरामुखी दान की गई जमीन ट्रांसफर करवाता और कुछ समय बाद उस जमीन को डेरा ट्रस्ट के नाम पर ट्रांसफर करवा लिया जाता। तूर ने बताया कि उन्होंने अपनी आंखों से पत्रकार छत्रपति ही हत्या के मामले में फंसे कुलदीप सिंह और निर्मल सिंह को राम रहीम की ओर से पिस्तौल चलाने की ट्रेनिंग देते देखा था। ट्रेनिंग देने के लिए मिट्टी की बोरियों के आगे कागज का टारगेट बनाया गया था।
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें