महिलाओं के प्रति अपराध में संवेदना बरतें लेकिन न्यायशास्त्र का स्वर्ण सिद्धांत न भूलें
अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में अभियोजन पक्ष की कहानी शुरू से ही कमजोर रही है। पीड़िता लड़कों के साथ जाते हुए जरा भी नहीं चिल्लाई, पीड़िता के अनुसार उससे कुछ गलत नहीं हुआ तो उसके अंतरवस्त्रों पर सीमन कैसे मिला। पुलिस ने दोबारा जांच निजी डॉक्टर से क्यों करवाई। हाईकोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट ने इन पक्षों पर गौर ही नहीं किया। भले ही मामला महिला के प्रति अपराध का है, लेकिन अदालतों को इन मामलों में संवेदनशील होने के साथ ही यह भी ध्यान रखना चाहिए कि अपराध न्यायशास्त्र का स्वर्ण सिद्धांत न टूटे।
यह है अपराध न्यायशास्त्र का स्वर्ण सिद्धांत
अपराध न्यायशास्त्र के स्वर्ण सिद्धांत के अनुसार आरोपी को स्वयं को निर्दोष साबित करने से अहम यह होता हे कि अभियोजन पक्ष आरोपी पर अपराध साबित करे। अपराध साबित करते हुए इसे किसी भी तरह के शक से ऊपर होना बहुत जरूरी है।