चंडीगढ़। पीजीआई में जटिल ट्यूमर को हीट से जलाकर इलाज शुरू कर दिया गया है। हेपटोलॉजी विभाग रेडियोफ्रिक्वेंसी मॉड्यूलेशन तकनीक का इस्तेमाल कर आसान तरीके से इलाज कर रहा है। देश के चुनिंदा अस्पतालों में ही इस तकनीक का प्रयोग हो रहा है। इसमें खास बात यह है कि मरीज की त्वचा के बजाय आंत के जरिए ट्यूमर तक जाकर उसे जलाकर खत्म किया जा रहा है। विभाग के डॉ. सहज राठी ने बताया कि चंद दिनों पहले इस तकनीक का प्रयोग कर एक इंसुलिनोमा के मरीज का इलाज किया गया है। उस मरीज में ट्यूमर के कारण इंसुलिन तेजी से बन रहा था। इससे उसका बीपी बढ़ रहा था और वह बेहोश हो जा रहा था। किन्ही अन्य कारणों से उस मरीज की सर्जरी नहीं की जा सकती थी। उसकी जान बचाने के लिए रेडियोफ्रिक्वेंसी मॉड्यूलेशन तकनीक से इलाज किया गया जो अब मरीज ठीक है।
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पहले त्वचा के अंदर सुई डालकर होता था इलाज
डॉ. सहज राठी ने बताया कि इससे पहले तक ऐसे मरीजों को त्वचा के अंदर विशेष इलेक्ट्रोड लगी सुई डालकर उसका इलाज किया जाता था लेकिन इस तकनीक के जरिए लिवर, अग्नाशय और आंत के नीचे वाले ट्यूमर तक पहुंचना मुश्किल होता था क्योंकि सुई बहुत नीचे तक नहीं जा पाती है लेकिन अब रेडियोफ्रिक्वेंसी मॉड्यूलेशन तकनीक में लंबी सुई वाले इलेक्ट्रोड को इंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड मशीन के जरिए आंत से होते हुए संक्रमित एरिया की सतह तक पहुंचाया जा सकता है जिससे नीचे वाले ट्यूमर को हीट कर उसी स्थान पर जला दिया जाता है। इस तकनीक से अब तक विभाग में चार मरीजों का सफल इलाज किया जा चुका है।
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विभाग में उच्चस्तरीय चिकित्सा तकनीक का प्रयोग कर मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया कराने का प्रयास हो रहा है। रेडियोफ्रिक्वेंसी मॉड्यूलेशन तकनीक छोटे ट्यूमर को नष्ट करने में सहायक साबित हो रही है।
-प्रो. अजय दुसेजा, प्रभारी हेपटोलॉजी विभाग पीजीआई