फरीदकोट के राजा हरिंदर सिंह बराड़ की 22 हजार करोड़ के प्रॉपर्टी विवाद में महरावल खेवाजी ट्रस्ट ने कोर्ट में अर्जी दायर कर एडवांस टैक्स अदा करने की अनुमति मांगी है।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत में दायर याचिका के अनुसार ट्रस्ट ने कई भवनों को दिल्ली में केंद्र सरकार के दफ्तरों के लिए किराये पर दिया हुआ है। ट्रस्ट इनके 19,66,49,349 रुपये किराए का 2,46,74,770 रुपये एडवांस टैक्स अदा करना चाहता है।
ट्रस्ट ने अदालत से खर्चों के लिए राशि को मासिक आधार पर तय करने की भी मांग की है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अदालत ने 50 लाख रुपये निकालने की अनुमति एक बार के लिए दी थी या हर महीने। राजा के छोटे भाई कंवर मंजीत इंदर के बेटे भरत इंदर ने प्रॉपर्टी की देखरेख के लिए एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग की थी।
भरत इंदर के वकील विवेक भंडारी ने अदालत को जयपुर रॉयल फैमिली का हवाला देकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को आधार मानकर एडमिनिस्ट्रेटर नियुक्त करने की मांग उठाई है। तीनों एप्लीकेशन पर सुनवाई 18 दिसंबर को होगी।
22 जुलाई को सीजेएम की अदालत ने राजा की 22 हजार करोड़ की प्रॉपर्टी का मालिकाना हक उनकी बड़ी बेटी अमृत कौर और दूसरी बेटी दीपिंदर कौर को दिया था।
निचली अदालत ने राजा की 1982 की वसीयत को अवैध ठहराया था। इस वसीयत में राजा ने महरावल खेवाजी ट्रस्ट बनाकर प्रॉपर्टी इसके नाम कर दी थी। इस ट्रस्ट की चेयरपर्सन महारानी दीपिंदर कौर हैं। ट्रस्ट ने इस फैसले को चुनौती दी थी।