चंडीगढ़। प्राचीन कला केंद्र की ओर से सेक्टर-18 के टैगोर थिएटर में आयोजित तीन दिवसीय नृत्य व संगीत सम्मेलन संपन्न हो गया। अंतिम दिन संतूर, बांसुरी और तबला की तिकड़ी ने कमाल दिखाए। वहीं, कथक ने भी दर्शकों का मन मोहा। पहली प्रस्तुति में संतूर वादक सतीश व्यास, बांसुरी पर चेतन जोशी और तबला पर अनुराधा पाल की तिकड़ी ने खूब रंग जमाया। इसके बाद कत्थक नर्तक कुमार शर्मा व उनके समूह ने शानदार प्रस्तुति दी। दर्शकों ने तालियां बजाकर कलाकारों का सम्मान किया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति में मुंबई से आए पंडित सतीश व्यास संतूर पर, दिल्ली के पंडित चेतन जोशी बांसुरी और मुंबई की ही पंडिता अनुराधा पाल ने तबला पर कला के जोरदार रंग जमाए। इसके उपरांत मुंबई के युवा कलाकार कुमार शर्मा ने अपने समूह के साथ कथक की बेहतरीन प्रस्तुति दी।
पंडित सतीश व्यास, पंडित चेतन जोशी और पंडिता अनुराधा पाल की तिकड़ी ने कार्यक्रम की शुरुआत के लिए राग रागेश्री को चुना। इसमें आलाप के बाद विलंबित झप ताल में निबद्ध जोड़ झाला प्रस्तुत किया। इसके बाद तीन ताल से सजी मध्य लय और द्रुत बंदिशें पेश कर वाहवाही लूटी। बांसुरी की मधुर धुन, संतूर की झंकार और तबले की थाप के सुंदर समावेश ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम का समापन पहाड़ी धुन से हुआ।
नृत्य से दिखाया विनाश के देवता का प्रचंड रूप
कार्यक्रम के दूसरे भाग में मुंबई से आए कलाकार कुमार शर्मा ने मंच संभाला। पहली प्रस्तुति में इन्होंने विनाश के देवता शिव का प्रतीकात्मक वर्णन नृत्य के माध्यम से दिखाया। इसमें उनकी प्रचंड ऊर्जा का चित्रण किया गया है। वह अपने ढोल या डमरू की आवाज से ब्रह्मांड को नियंत्रित करते हैं। इसके उपरांत तकनीकी पक्ष पेश किया गया जिसमें उन्होंने ताल धमार में कथक के तकनीकी भाग उपज, थाट, परन आमद, टुकड़ा, टोडा, तिहाई, जुगलबंदी आदि प्रस्तुत किया। इसके बाद अभिनय पर आधारित नृत्य पेश किया गया।
कलाकारों को सम्मानित किया
शो के दूसरे भाग में कुमार शर्मा की ओर से उनके वायरल वीडियो हम कथा सुनाते का लाइव गायन पेश किया गया। महाभारत पर अमित शर्मा और महाभारत शीर्षक ट्रैक पर एक नृत्य प्रदर्शन के साथ समापन किया गया। कुमार शर्मा के समूह में राहुल शर्मा, अनमोल सूद, शम्मी कुमार, इशिका चूमर, मृदुल राजपाल, राशि नरूला एवं मेघना ठाकुर ने प्रस्तुति पेश की। इनके साथ मंच पर संगतकारों में ऋषभ शर्मा ने तबले पर, जयंत पटनायक पखावज पर संगत किया। इस दौरान कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में उत्कल यूनिवर्सिटी भुवनेश्वर के रजिस्ट्रार आव्या कुमार नायक और संस्कृत विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष सुभाष चंद्र दास विशेष अतिथि के रूप से उपस्थित हुए। इस मौके पर केंद्र की रजिस्ट्रार डॉ. शोभा कौसर व सचिव सजल कौसर भी उपस्थित रहे।