मशहूर गीतकार निदा फाजली को वीरवार को चंडीगढ़ में जिस कार्यक्रम में शामिल होना था, वहां उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी गई। सबकी निगाहें बार-बार उस महान शायर को तलाशतीं रहीं जिसने आम आदमी के सुख दुख को, उसकी जिंदगी को अपनी शायरी का हिस्सा बनाया।
टैगोर थिएटर में ‘सफर गजल कंसर्ट’ में पहुंचे प्रसिद्ध गायक कमाल अहमद ने भी यह बात साझी की। उन्होंने कहा कि निदा फाजली ने उनसे इस कार्यक्रम में आने का वादा किया था लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं हैं। गजल गाते समय मेरी निगाहें हर वक्त दर्शकों के बीच उनको ढूंढती रहीं। इस मौके पर कमाल अहमद ने निदा फाजली से जुड़ी कुछ यादें साझा कीं।
उन्होंने कहा कि वह काफी हेल्पफुल नेचर के इंसान थे। मेरे लिए गार्जियन की तरह थे। उन्होंने बताया कि फाजली साहब पिछले महीने ही मेरे घर आए थे। वहां उन्होंने वादा किया था कि चंडीगढ़ में इसी कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। लेकिन वह वादा पूरा नही हो पाया। जिसका मुझे मलाल हो रहा है। कमाल के साथ कंसर्ट में गायक रणबीर कुमार ने भी शिरकत की। वसुधा फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को निदा फाजली की याद में समर्पित कर दिया गया।
शायरी सदा साथ रहेगी
गायक रणबीर कुमार ने कहा कि निदा फाजली अब इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन उनकी शायरी इस कार्यक्रम में साथ है और आने वाले सभी प्रोग्राम में हमारे साथ होगी। निदा फाजली अपनी कलम के जरिए हमेशा जिंदा रहेंगे। रणबीर ने बताया कि फाजली की गजल- ‘कोई हिंदू कोई मुस्लिम, कोई ईसाई, सबने इंसान न बनने की कसम खाई’ उनकी फेवरिट गजलों में से एक है।
यह गजलें सुनाईं
कार्यक्रम में कमाल अहमद ने ‘तमाम उम्र मुझे जिसका इंतजार रहा, जब भी किसी निगाहों ने मौसम सजाया, सफर जो चल सको तो चलो’ आदि गजलें सुनाकर सभी का मन मोह लिया। वहीं रणबीर कुमार ने - ‘चांद से फुल से या मेरी जुंबा से, हर बात को चुपचाप क्यों सुना जाएं, होश वालों को खबर क्या बेखुदी क्या चीज हैं ’गाकर समां बांध दिया।