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Chandigarh News: 1.9 करोड़ के घोटाले की जांच में खजाना विभाग नहीं कर रहा सहयोग, पांच बार पत्र भेजने पर भी छुपा रहा जानकारी

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जांच अधिकारी ने आलाधिकारियों को कराया अवगत, परिवहन मंत्री के सामने रखा जा सकता है मामला
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अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। परिवहन विभाग के चंडीगढ़ डिपो में हुए 1.9 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में खजाना विभाग सहयोग नहीं कर रहा है। घोटाला अवधि के दौरान खजाना विभाग में तैनात अधिकारियों की जानकारी के लिए जांच अधिकारी पांच बार विभाग को पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जानकारी देना तो दूर, पत्रों का जवाब तक नहीं दिया जा रहा है। जांच अधिकारी ने अपने आला अधिकारियों को अवगत करा दिया है। संभावना है कि अब मामला परिवहन मंत्री के सामने रखा जाएगा, ताकि जांच शुरू हो सके।
2018 में हुए इस घोटाले को लेकर चंडीगढ़ पुलिस ने केस दर्ज किया हुआ है और जांच कर रही है। इसके अतिरिक्त जुलाई, 2023 में हरियाणा सरकार ने एक वरिष्ठ अधिकारी को इस मामले की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी। सरकार के पास इसकी शिकायत पहुंची थी कि इस खेल में केवल क्लर्क शामिल नहीं था, बल्कि उस समय में तैनात खजाना विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों का भी रोल रहा था। घोटाले की परतें खोलने के लिए सरकार ने जांच अधिकारी तो नियुक्त कर दिया, लेकिन तीन माह बाद भी जांच एक कदम भी आगे नहीं बढ़ पाई है। जांच अधिकारी केवल पत्र लिखने तक सीमित रह गए हैं, खजाना विभाग की ओर से उनको कोई जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। इस बारे में हरियाणा खजाना विभाग के निदेशक पंकज सिंह को फोन और मैसेज किए गए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।
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कब-कब लिखे गए पत्र
जांच अधिकारी द्वारा खजाना विभाग के निदेशक को पिछले तीन माह में पांच बार पत्र भेजे जा चुके हैं। सबसे पहले 3 जुलाई, 11, 14 और 17 जुलाई को पत्र भेजे गए। इसके बाद भी जब कोई जवाब नहीं मिला तो जांच अधिकारी ने 20 सितंबर को एक और रिमाइंडर विभाग को भेजा। जांच अधिकारी ने इस मामले में खजाना विभाग हरियाणा से 1 अप्रैल, 2015 से 31 जुलाई 2017 तक चंडीगढ़ खजाना कार्यालय में तैनात खजाना अधिकारियों का ब्योरा मांगा है। पत्र में कहा गया है कि फर्जी बिलों के पास अवधि के दौरान खजाना विभाग में तैनात रहे डीलिंग अधिकारी, सहायक खजाना अधिकारी और खजाना अधिकारियों की सूची और उनकी कार्य की जिम्मेदारी भी बताई जाए।
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2018 में हुआ था घोटाले का खुलासा

इस घोटाले का खुलासा अक्तूबर 2018 में हुआ था। तत्कालीन चंडीगढ़ वर्कशाप के जीएम आरके गोयल की शिकायत पर केस दर्ज किया गया था। आरोप है कि क्लर्क संजय ने हरियाणा रोडवेज के सेंट्रल वर्कशॉप, करनाल और हरियाणा इंजीनियरिंग निगम, गुरुग्राम के बिलों में गड़बड़ी कर फर्जीवाड़ा किया था। आरोपी क्लर्क के अलावा भिवानी के प्रहलाद, महेंद्रगढ़ के रतन सिंह, चरखीदादरी के राजकुमार, राजस्थान के चूरू जिले के विनोद समेत दिल्ली के अंकुर को गिरफ्तार किया जा चुका है। लेकिन आज तक किसी खजाना अधिकारी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। जबकि बिलों की अदायगी खजाना विभाग के अधिकारियों द्वारा ही की गई थी।
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