ट्रांसजेंडर्स पर आधारित वर्कशॉप में बोलते हुए जस्टिस सूर्यकांत
- फोटो : अमर उजाला
पुरुष और महिलाओं की तरह समाज में ट्रांसजेंडर्स भी हैं, लेकिन क्या आप इनसे जुड़ा एक अनोखा सच जानते हैं। ट्रांसजेंडर्स को भी शिक्षा और नौकरी में समानता का अधिकार मिला हुआ है। अब जेंडर कॉलम में ट्रांसजेंडर मेल या फीमेल में से अपनी मर्जी से जेंडर भर सकते हैं।
यह जानकारी स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी (एसएलएसए) एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के जज जस्टिस सूर्य कांत ने दी। वे सेक्टर-43 स्थित ज्यूडिशियल अकादमी में आयोजित ‘राइट्स ऑफ ट्रांसजेंडर्स एंड जेंडर आईडेंडेटी’ नाम से एक दिवसीय वर्कशॉप में बोल रहे थे।
ट्रांसजेंडरों को समाज की मुख्य धारा में लाते हुए और उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और नौकरी में समानता का अधिकार देने के लिए मुंबई के ‘हमसफर’ के संयुक्त तत्वावधान में वर्कशॉप लगाई गई थी।
ट्रांसजेंडर्स को मिल चुका है नौकरियों में समानता का अधिकार
ट्रांसजेंडर्स पर आधारित वर्कशॉप में बोलते हुए जस्टिस सूर्यकांत
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वर्कशॉप में बतौर मुख्य अतिथि जस्टिस सूर्यकांत ने नालसा की ‘विक्टिम्स ऑफ ट्रैफिकिंग एंड कॉमर्शियल सेक्सुअल एक्सप्लोईटेशन’ स्कीम को यूटी में पूरी तरह लागू करने के लिए सभी को प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि नालसा के आदेश के तहत ट्रांसजेंडर्स को अब नौकरी, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा आदि में पूरी तरह से समानता का अधिकार मिल चुका है।
वहीं हमसफर ट्रस्ट की ओर से सूरज ने बताया कि वह सेक्सुअल माइनॉरिटिस, जिनमें गे, लेस्बियन, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर्स व किन्नर शामिल हैं, उन्हें समान स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। ऐसे में अब समानता का अधिकार मिलने पर इन्हें सरकारी नौकरी और एजुकेशन हासिल करने में आसानी होगी। वहीं स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी की ओर से नालसा स्कीम को लेकर किए जा रहे कार्यों की भी जानकारी दी गई।
इस मौके पर स्टेट लीगल सर्विस अथॉरिटी के सदस्य सचिव महावीर सिंह ने ट्रांसजेंडरों से संबंधित विषय पर वर्कशॉप में सवाल-जवाब किए। वर्कशॉप में ट्रेनी ज्यूडीशियल ऑफिसर्स, लेबर डिपार्टमेंट, पुलिस, समाज कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, एड्स कंट्रोल सोसाइटी, लीगल सर्विस के सदस्य, पैरा लीगल वालंटियर्स, मीडिएटर्स के अलावा स्कूल-कॉलेजों के लीगल लिटरेसी क्लब के इंचार्ज भी मौजूद रहे।