चंडीगढ़। सपने तभी सच होते हैं जब आप अपने ऊपर विश्वास रखते हैं और उसे लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अपना सबकुछ झोंक देते हैं। ऐसा ही उदाहरण पेश किया है तीन साइकिलिस्ट दोस्त गौतम लाल, गुरदर्शन विरदी और हरमन बाबा ने। उन्होंने दिल्ली से अटॉरी बॉर्डर और वहां से वापस दिल्ली 1000 किलोमीटर का सफर 75 घंटे में पूरा कर दिखाया है। बेशक कम आराम, लंबा जाम, पराली का प्रदूषण, अंधेरा और चाहे कई बधाएं रास्ते में आईं, लेकिन इनके पांव पैडल से नहीं उतरे।
साइक्लिंग ग्रुप के सदस्यों ने बताया कि इस सफर की तैयारी के लिए वे ट्राइसिटी में रोज 20 से 50 किलोमीटर साइकिल चलाते थे। खुद को दिमागी और शारीरिक तौर पर तैयार करने के लिए सितंबर में तीनों ने 200 किलोमीटर की नाइट राइड की थी। उन्होंने बताया कि दिल्ली में ट्रैफिक और पॉल्यूशन की वजह से दिक्कत आई। यह सफर 28 अक्तूबर को दिल्ली से शुरू हुआ। 29 अक्तूबर को अटारी रेलवे स्टेशन पहुंचे तो बहुत खुशी महसूस हुई। हमने न सिर्फ अपनी राइड का आधा सफर 505 किलोमीटर पूरे लिया था बल्कि हम भारत-पाकिस्तान सीमा से मात्र 2 किलोमीटर की दूरी पर थे। 30 अक्तूबर को सुबह 6.40 बजे दिल्ली के लिए राइड शुरू कर दी। हमारी राइड का एक चैक प्वाइंट करनाल रहा। इसके बाद 75 घंटे का समय खत्म होने से पहले ही दिल्ली पहुंच गए। गौतम का कहना है कि इस सफर में उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला और भविष्य में भी इस तरह का सफर कर लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करेंगे।