चंडीगढ़। शहर के लिए नीति बनाने वाले अफसर जब दफ्तरों से निकलकर जनता से संवाद करेंगे तब सिटी ब्यूटीफुल की तस्वीर बदलेगी और इसका भविष्य संवरेगा। यह बात सोमवार शहर के डॉक्टर, शिक्षक, कोच, समाजसेवी, कलाकार समेत विभिन्न क्षेत्रों के प्रोफेशनल्स ने एकमत होकर कही। ये सभी सेक्टर-9 स्थित अमर उजाला कार्यालय में भविष्य का चंडीगढ़ कैसा हो... थीम पर आयोजित बेस (बिजनेस, अकादमिक, सोशल और एंटरप्रन्योरशिप) डायलॉग में पहुंचे थे।
बेस डायलॉग में शामिल सभी प्रोफेशनल्स 35 वर्ष से कम की उम्र के थे। सभी ने चंडीगढ़ की समस्याओं, भविष्य की चुनौतियों और समाधान पर खुलकर अपनी बात रखी। ज्यादातर ने बढ़ती जनसंख्या को समस्याओं की जड़ बताया। सरकारी दफ्तरों में भ्रष्टाचार, स्कूलों में सीट की कमी, अस्पतालों में बेड का संकट समेत तमाम समस्याएं गिनाईं और प्रशासन को आगाह किया कि अगर समय रहते बेहतर नीतियां नहीं अपनाईं गईं तो स्थिति खराब हो जाएगी। कहा कि भविष्य का चंडीगढ़ आज के फैसलों पर निर्भर करेगा इसलिए अगले दो साल ही चंडीगढ़ के 10 साल का रास्ता तय करेंगे। कार्यक्रम में पहुंची जीएमएसएच-16 की नर्सिंग ऑफिसर दबिंदर कौर ने कहा कि स्वास्थ्य सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है, क्योंकि चंडीगढ़ को एक मेडी सिटी के रूप में जाना जाता है।
तेजी से बढ़ रही जनसंख्या समस्याओं की जड़
सभी समस्याओं की जड़ तेजी से बढ़ रही जनसंख्या है। ये शहर पांच लाख लोगों के लिए बनाया गया था अब 12 लाख के करीब लोग रह रहे हैं इसलिए शिक्षा, स्वास्थ्य समेत तमाम क्षेत्रों पर दबाव है। नीतिगत सुधारों की जरूरत है। जो लोग आवाज उठाते हैं, उनके काम हो जाते हैं बाकी दफ्तरों के चक्कर लगाते रहते हैं। अधिकारियों को जनता के बीच जाकर समस्याएं सुननी चाहिए तभी शहर का संपूर्ण विकास होगा। - डॉ. राहुल चक्रवर्ती, अध्यक्ष, पीजीआई आरडीए
असल मुद्दों पर होगा काम तब संवरेगा चंडीगढ़
चंडीगढ़ का भविष्य तभी बेहतर होगा जब असल मुद्दों पर काम होगा। प्लास्टिक अभियान सिर्फ कागजों में है। दूध की थैलियों के रूप में सबसे ज्यादा प्लास्टिक आ रहा है। इसकी जगह कांच की बोतल होनी चाहिए। फ्रांस से सैकड़ों करोड़ का लोन लेकर 24 घंटे पानी का प्रोजेक्ट क्यों लाया जा रहा है जबकि जरूरत लीकेज में बर्बाद हो रहे 35 फीसदी पानी को बचाने की है। चंडीगढ़ के बच्चों को ही स्कूलों में दाखिला नहीं मिल रहा है। यहां की नौकरियां पंजाब-हरियाणा के युवा ले जा रहे हैं। सोचने की जरूरत है।
- मनोज शुक्ला, अध्यक्ष, समस्या समाधान टीम
ट्राइसिटी को एक मानकर परियोजनाएं लानी होंगी
मैं पिछले पांच साल से चंडीगढ़ में हूं। महसूस किया है कि शहर में कुछ अच्छा करने की चाह में बहुत कुछ खराब हो रहा है। छात्रों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयोग नहीं हो रहे। मरीज बढ़ रहे हैं, इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं। डंपिंग ग्राउंड बीमारियां फैला रहा है। ट्रैफिक की समस्या है। ट्राइसिटी को एक मानकर विकास की परियोजनाएं लानी होंगी।
- डॉ. पीयूष, सीनियर रेजिडेंट डॉक्टर, पीजीआई
पंजाब-हरियाणा अपने दफ्तर यहां से ले जाएं
सिटी ब्यूटीफुल से स्मार्ट सिटी बनने के चक्कर में न सिटी ब्यूटीफुल रहे और न स्मार्ट। अब जगह-जगह जाम लग रहे हैं। पंजाब और हरियाणा को अपने दफ्तर अलग-अलग जिलों में ले जाने चाहिए लेकिन यहां उल्टा हो रहा है। हरियाणा अपनी विधानसभा चंडीगढ़ में बनाने जा रहा है। मेयर का कार्यकाल एक साल का है, इस वजह से वह कोई ठोस फैसला नहीं ले पाते हैं। अच्छे शिक्षकों की क्वालिटी बच्चों में ट्रांसफर नहीं हो पा रही।
- शिप्रा, अध्यक्ष, परवाज फाउंडेशन
बीच में ही कार्यों को छोड़ देता है प्रशासन
मैंने महसूस किया है कि चंडीगढ़ में कोई काम शुरू होता है लेकिन उसे बीच में ही छोड़ दिया जाता है। पीजी में आग लगने की घटना के बाद काफी हंगामा हुआ था। प्रशासन ने कई नियम बनाए। कई पीजी सील हुए। कइयों पर कार्रवाई हुई लेकिन अब सब कुछ पहले जैसा हो गया है। आज भी बाहर से आने वाले छात्र कुछ फुट के पीजी में रहने को मजबूर हैं। साइकिल स्टैंड पर साइकिल नहीं होतीं, जो नजर आती हैं, चलती नहीं। - अंगदजीत, छात्र, पीयू
खेल के प्रति लोगों को जागरूक करने की जरूरत
विडंबना है कि चंडीगढ़ में आज तक खेल नीति नहीं बनी। पड़ोसी राज्यों में खिलाड़ियों को जॉब सिक्योरिटी समेत कई अवार्ड और पूरा मान-सम्मान मिलता है। यहां इसकी कमी खलती है। लोगों को खेल के प्रति जागरूक करने की जरूरत है। शहर में योग दिवस मनाया जाता है लेकिन सेल्फ डिफेंस दिन क्यों नहीं होता जबकि ये बहुत जरूरी है। मार्शल आर्ट्स के लिए शहर में इन्फ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है। उस पर ध्यान देना चाहिए।
- यामिनी गुप्ता, ताइक्वांडो कोच
चंडीगढ़ को कल्चरल हब बनाने की जरूरत
शहर की चुनौतियां बढ़ गई हैं। कलाकारों को नाटक के लिए स्पांसर नहीं मिलते। 200 से ज्यादा संस्थाएं हैं, जिनमें से 35-40 सक्रिय हैं लेकिन थिएयर के लिए सिर्फ टैगोर ही है। उसका खर्च सभी नहीं उठा सकते। रिहर्सल के लिए थिएटर की जरूरत है। जो ओपन एयर थिएटर बने हैं, वहां कोई सुविधा नहीं। वहां नशेड़ी बैठते हैं। नुक्कड़ नाटक के लिए भी लिखित इजाजत लेनी पड़ती है। चंडीगढ़ को कल्चरल हब बनाने की जरूरत है। - अभिषेक शर्मा, परंपरा आर्ट्स के निर्देशक
बारिश के पानी का संरक्षण करने की जरूरत
मैं राजस्थान से हूं और वर्ष 2016 में चंडीगढ़ आया था। यहां कुछ नया नहीं हो रहा। पेड़ लगाए जा रहे हैं लेकिन सिर्फ फोटोशूट के लिए। राजस्थान में पानी की अहमियत लोगों को पता है। यहां बारिश का पानी ऐसे ही बह रहा है। संरक्षित नहीं किया जा रहा। निजी स्कूलों में फीस की एक कैपिंग होनी चाहिए। पीजीआई के बाहर हजारों लोग रोजाना लंगर खाते हैं। जो लंगर खिला रहे हैं, उनके लिए अच्छा व्यवस्था होनी चाहिए। अस्पतालों में बेड की संख्या भी बढ़ानी होगी। - ओम प्रकाश, नर्सिंग ऑफिसर, जीएमएसएच-16