हर साल की तरह इस बार भी धुंध में अंबाला डिवीजन की ट्रेनों का देरी से चलने का सिलसिला बना रहेगा। सर्दी के दस्तक देते ही ट्रेनें लेट होनी शुरू हो चुकी हैं।
जबकि उत्तर रेलवे पिछले तीन साल से धुंध नियंत्रण यंत्र (एंटी फॉग एंड कॉलिजन डिवाइस) के ट्रायल से आगे नहीं बढ़ पाया है। जिसके चलते कई बेगुनाह यात्रियों को रेल दुर्घटनाओं का शिकार होना पड़ रहा है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक योजना की लागत अधिक होने से वह आकार नहीं ले पा रही है। इसके चलते कोहरे से निपटने का रेलवे पचास साल पुराने उपाय का इस्तेमाल कर रहा है कि धुंध के दौरान ट्रेनों की रफ्तार कम कर देता है और ज्यादा लेट होने पर उसे रद्द कर देता है।
हालत यह है कि कोहरे के चलते हर साल हजारों गाड़ियों का संचालन प्रभावित होता है और लाखों यात्रियों का परेशानी उठानी पड़ती है। इस मसले पर अंबाला डिवीजन के अधिकारी कहते हैं कि इसका फैसला मंत्रालय के हाथ में है।
क्या है एंटी फॉग एंड कॉलिजन डिवाइस
इस डिवाइस से भीषण कोहरे के दौरान भी ट्रेन ड्राइवर के लिए 400 मीटर तक ट्रैक जांचना संभव हो जाएगा। अवरोध की स्थिति में ट्रेन में स्वत: ब्रेक लग जाएगा।
यह डिवाइस ड्राइवर को बताती है कि सिग्नल कितनी दूर है। जिसके मुताबिक वह ट्रेन की रफ्तार तय कर सकता है। इससे कोहरे के दौरान ट्रेनों को अनावश्यक तौर पर धीमा रखने से बचने में मदद मिलती है। इसके अलावा अन्य सावधानियों पर भी पूरा ध्यान दिया जा सकता है।
प्रोजेक्ट की कीमत बनी बाधा
रेलवे सूत्रों के मुताबिक परीक्षण में करोड़ों खर्च के अलावा सिग्नल सिस्टम में समन्वय न बन पाने के कारण ये उपकरण ट्रेनों में उपयोग नहीं हो पा रहा है।
बताया जा रहा है कि इस उपकरण को कम खर्च में तैयार करने का प्रयोग किया जा रहा है। ट्रेनों में इस डिवाइस का परीक्षण किया गया था, लेकिन इसकी लागत करोड़ों में होने के चलते रेलवे बोर्ड ने प्रस्ताव का ठंडे बस्ते में डाल दिया।
इन रूटों पर ज्यादा होती हैं दुर्घटनाएं
कोहरे से जुड़ी ज्यादातर दुर्घटनाएं चंडीगढ़, अंबाला, लुधियाना, जम्मू दिल्ली-कानपुर-इलाहाबाद रूट पर होती हैं। लिहाजा इससे जुड़े उपायों का जिम्मा मुख्यत: उत्तर रेलवे का है।