चंडीगढ़। छह न्यायिक अधिकारियों के जाली हस्ताक्षर पर 60 जब्त वाहनों को छोड़ने के मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को ट्रैफिक पुलिस के एसएसपी शशांक आनंद सीबीआई अदालत में पेश हुए। इस दौरान उनसे मामले से संबधित पूछताछ की गई। अदालत ने एसएसपी से पूछा कि उन्होंने पहले क्रॉस चेक क्यों नहीं किया। अगर वह जांच कर लेते तो इस घोटाले का खुलासा पहले ही हो जाता।
सूत्रों के अनुसार अदालत में ड्रंकन ड्राइव के लिए जब्त वाहनों और उनके रिकॉर्ड के बारे में कई सवाल-जवाब किए गए। मामले में स्टेट इन्फॉरमेटिव ऑफिसर से भी वाहनों की डाटा रिपोर्ट मांगी गई है। जल्द ही मामले की जांच रिपोर्ट सबमिट किए जाने की संभावना है।
पूर्व मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अभिषेक फुटेला ने दिसंबर 2019 में जिला एवं सत्र न्यायाधीश परमजीत सिंह को जालसाजी के बारे में एक पत्र लिखा था। इसके बाद फरवरी में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के जज सुशील कुमार गर्ग को जांच सौंप दी गई। यह मामला तब सामने आया, जब अदालत में मामला लंबित होने के बावजूद कुछ वाहनों को छोड़ दिया गया।
ट्रैफिक पुलिस के अधिकारियों ने पाया कि ड्रकंन ड्राइव के लिए जब्त वाहनों के चालान अदा करने के बाद उन्हें छोड़े गए वाहनों की लिस्ट में शामिल नहीं किया गया। पाया गया कि 56 वाहन ऐसे हैं, जिन्होंने चालान का भुगतान नहीं किया और मामला अदालत में लंबित है। इसके बाद भी सेक्टर-29 ट्रैफिक लाइन और सेक्टर-23 के पार्क से वाहनों को छोड़ दिया गया। चार वाहन ऐसे पाए गए थे, जिनका अदालत के रिकॉर्ड में नाम नहीं था, इसलिए उनकी ओर से जुर्माना भी अदा नहीं किया गया।
सूत्रों का कहना है कि पिछले साल नवंबर में दस दिनों के अंदर छह न्यायिक मजिस्ट्रेट के जाली हस्ताक्षर कर 60 वाहनों को छोड़ने के आदेश जारी किए गए। इस दौरान अदालत की स्टैंप और अन्य रिकॉर्ड का दुरुपयोग किया गया। इस घोटाले में अदालत के कर्मचारियों अहलमद, मुंशी और वकीलों के होने की संभावना है। इन वाहनों में ड्रंकन ड्राइव के 10 हजार की राशि समेत तीन लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था।