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ट्रैफिक पुलिस ने इस साल ढाई लाख से ज्यादा चालान काटे

Sun, 29 Dec 2013 01:46 AM IST
अमर उजाला, चंडीगढ़
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ट्रैफिक पुलिस ने इस साल 20 दिसंबर तक ढ़ाई लाख चालकों के अलग अलग नियम तोड़ने वालों के चालान काटकर 8 करोड़ 9 लाख रुपये जुर्माने से कमाई की है। जबकि पिछले साल अब तक 1 लाख 8 हजार लोगों के चालान काटकर 5.5 करोड़ रुपये इकट्ठे किए गए थे। इस साल ट्रैफिक पुलिस की ओर से विशेष तौर पर दोपहिया वाहन चालकों पर ध्यान दिया गया है। बिना स्ट्रीपिस (बेल्ट) के वाहन चलाने वाले अब तक 24 हजार 912 चालकों के चालान काटे गए है जबकि पिछले साल सिर्फ 3 ऐसे चालकों के चालान काटे गए है जबकि चालकों का कहना है कि पुलिस को चालकों को चालान न काटकर जागरूक करना चाहिए।
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इस साल ट्रैफिक पुलिस की ओर से विशेष तौर पर नो पार्किंग और सड़क किनारे वाहन चलाने वालों के सबसे ज्यादा चालान काटे गए है जबकि शहरवासियों का कहना है कि बाजारों, रिहायशी इलाकों और सावर्जनिक स्थलों में पार्किंग की जगह कम है ऐसे में प्रशासन को नए पार्किंग स्थल बनाने पर भी जोर देना चाहिए। इस साल 20 दिसंबर तक 24 हजार चालकों के चालान रोग पार्किंग के काटे गए है जबकि पिछले साल अब तक 13 हजार चालकों के चालान नो पार्किंग के काटे गए थे। सबसे ज्यादा चालान पुलिस की ओर से बाजारों में खड़े नो पार्किंग के वाहन के काटे गए है ऐसे वाहनों को पुलिस की क्रेन उठाकर भी ले जाती है। इसके अलावा इनमे वह चालान भी शामिल है जिनकेवाहनों पर पुलिस नो पार्किंग के स्टीकर भी चिपका जाती है। इस साल अब तक 3.9 लाख अलग अलग वायलेंशन में चालाकों के चालान कटे है जबकि पिछले साल इनकी संख्या 2.2 लाख थी। व्यापार मंडल के अध्यक्ष चरणजींव सिंह का कहना है कि शहर में चालान काटने की ओर से पुलिस का ज्यादा जोर है जबकि जागरूकता के नाम पर इतना प्रयास नहीं किया जा रहा है।

जब्त करने वालों की संख्या बढ़ी
इस साल ट्रैफिक पुलिस की ओर से पिछले साल के मुकाबले में ज्यादा वाहन जब्त किए गए है। ट्रैफिक पुलिस कोई भी दस्तावेज न होने पर चालक का वाहन जब्त करती है। इस साल अब तक 13 हजार से ज्यादा वाहनों को जब्त किया गया है जबकि पिछले साल इकनी संख्या 8 हजार थी। इस बार ड्रंक एंड ड्राइविंग केचालानों की संख्या में कमी आई है। इस साल पुलिस की ओर से नाकों पर 4500 चालान काटे गए है जबकि पिछले साल अब तक इनकी संख्या 4600 थी। इस साल बिना हेलमेट पहन कर वाहन चलाने वालों के भी पिछले साल के मुकाबले में करीब साढ़े तीन हजार के चालान कम कटे है।
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ट्रैफिक पुलिस के एसएसपी मनीष चौधरी का कहना है कि पुलिस का लक्ष्य चालान काटना नहीं बल्कि लोगों को नियमों के प्रति जागरूक करना है। उनका कहना है कि नियम को तोड़ने वाला चालक अपने साथ साथ सड़क पर चलने वाले अन्य चालकों के लिए भी खतरनाम साबित होता है। उन्होंने बताया कि हर कोई चालक नो पार्किंग को लेकर जागरूक है ऐसे में भविष्य में भी रोग पार्किंग वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी।
किस प्रकार के चालान      पिछले साल      इस साल (20 दिसंबर तक)
बिना हेलमेट           43500                 40500
ड्रंक एंड ड्राइविंग     4500                   4600
रोंग पार्किंग          12000                   24000
लेन बदलना          950                    400
जेबरा क्रासिंग       23500                 13600
मोबाइल फोन प्रयोग 6070                  6000
रेड लाइट जंप        23614               43640
हेलमेट बिना स्ट्रीपिस  3                 करीब 25 हजार
बिना सीट बेल्ट     11500             17 हजार
रोग साइड ट्रन       14000           25070
रोग नंबर प्लेट      1820             6171
हाईबीम हेड लाइट  51              2410

12 महिलाओं के चालान कटे
शराब पीकर वाहन चलाने वाली महिलाओं के भी नाकों के दौरान पुलिस ने चालान काटे है। इस साल पुलिस ने अब तक कुल एक दर्जन ऐसी महिलाओं के चालान काटे है जिनके वाहन भी जब्त किए गए है जबकि पिछले साल सिर्फ दो ऐसी महिलाओं केचालान काटे गए थे जो कि शराब पीकर वाहन चला रही थी। इस बार अब तक आधा दर्जन बार एलकोहल मीटर (शराब की मात्रा जांचने का यंत्र) की खामी को लेकर नाके पर पुलिस और चालकों में बवाल हो चुका है।
नो पार्किंग के चालान बढ़ेंगे
ट्रैफिक पुलिस का भी मानना है कि शहर में बाकी चालानों की संख्या तो कम हो सकती है लेकिन नो पार्किंग के चालानों की संख्या कम नहीं हो सकती है क्योंकि शहर में पार्किंग स्थलों की संख्या काफी कम है। बाजारों में शाम को हर समय पार्किंग फुल रहती है और प्रशासन और नगर निगम इस ओर कोई प्रयास नहीं कर रही है।  विभाग की ओर से सेक्टर-17,22 और 34 में नए पार्किंग स्थल बनाने का प्रस्ताव भेजा गया है। ट्रैफिक मार्शल सुनील भारद्वाज का कहना है कि नगर निगम की ओर से तीन साल से कम्युनिटी पार्किंग स्थल बनाने का प्रस्ताव बनाया गया है लेकिन अभी तक इसे लागू नहीं किया गया है।
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