सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा ने बताया कि नीतिगत निर्णय के तहत आवश्यक सेवाओं को बाधित नहीं किया जाएगा। अगर किसी कारण से कोई आवश्यक सेवा बाधित होती है तो कर्मचारी हड़ताल पर रहते हुई बाधित सेवाओं को बहाल करने का काम करेंगे। हड़ताल पूरी तरह शांतिपूर्ण होगी। 20 दिसंबर को हड़ताल का नोटिस भेजकर 20 सूत्रीय मांग पत्र भेजा गया था। मांगों का समाधान तो दूर सरकार ने बातचीत तक करना जरूरी नहीं समझा। सरकार ने कर्मचारियों को हड़ताल करने पर मजबूर किया है।
स्वच्छता अभियान को छोड़ शेष कर्मचारी हड़ताल में होंगे शामिल
नगरपालिका कर्मचारी संघ के राज्य प्रधान नरेश शास्त्री ने दावा किया कि स्वच्छता अभियान के कर्मचारियों को छोड़कर पालिका, परिषद एवं नगर निगम में कार्यरत सभी तृतीय, चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी, फायर विभाग के ड्राइवर, फायरमैन, सफाई कर्मचारी और सीवरमैन भी हड़ताल में भाग लेंगे। वरिष्ठ उपाध्यक्ष रमेश तूषमड, महासचिव मांगेराम तिगरा, अग्निशमन विभाग के राज्य प्रधान राजेंद्र सिंह सिनद ने कहा कि प्रदेश के 10 नगर निगमों, 19 नगर परिषदों और 61 नगर पालिकाओं के 32 हजार कर्मचारी हड़ताल में शामिल होंगे।
सरकार ने यदि जल्द बातचीत कर मांगों का समाधान नहीं किया तो नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा 15 जनवरी को रोहतक में महिला कार्यकर्ताओं की राज्य स्तरीय कंवेंशन के केंद्रीय कमेटी की बैठक कर बड़े आंदोलन की घोषणा करेगा।
नरेश शास्त्री ने बताया कि हरियाणा सरकार के सफाई कर्मचारियों का नाम बदलकर स्वच्छता दूत रखने के सुझाव को सिरे से नकार दिया है। सफाई कर्मचारियों को सम्मान देने और नाम बदलने से काम नहीं चलेगा। सफाई कर्मचारियों व सीवरमैन को सुरक्षा उपकरण एवं रोजगार को नियमितीकरण करने की आवश्यकता है ताकि सीवरमैन की मृत्यु पर रोक लग सके।
राष्ट्रव्यापी हड़ताल की मुख्य मांगें
एनपीएस को खत्म कर पुरानी पेंशन स्कीम बहाल करो, श्रम कानूनों में किए जा रहे मजदूर विरोधी संशोधन पर रोक लगे, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं रोडवेज सहित जनसेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाएं, पंजाब के समान वेतनमान एवं पेंशन दें, सभी प्रकार के पार्ट-टाईम, अनुबंध कर्मचारियों को पक्का करें, वास्तविक खर्च पर आधारित कैशलैश मेडिकल सुविधा दें, एक्सग्रेसिया रोजगार स्कीम में सेवा व उम्र की शर्तों को हटाएं, एचआरए में बढ़ोतरी जनवरी 2016 से लागू हो, सभी प्रकार की दमन एवं उत्पीड़न कार्रवाई खत्म की जाएं।
हरियाणा में ट्रेड यूनियनों की हड़ताल अवैध करार
हरियाणा सरकार ने ट्रेड यूनियनों के आह्वान पर प्रदेश में बुधवार को हो रही कर्मचारी संगठनों की हड़ताल को अनुचित करार दिया है। मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्त, डीसी, बोर्ड, निगमों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य प्रशासकों को हड़ताल से निपटने के लिए उचित प्रबंध करने के निर्देश दिए हैं।
हड़ताल के दौरान सरकारी कार्य में खलल डालने वाले कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश जारी किया गया है। सभी विभागाध्यक्षों को बुधवार को दो बार अपने अधीनस्थ कर्मचारियों की हाजिरी मुख्य सचिव कार्यालय की राजनीतिक शाखा को भेजनी होगी। सुबह बारह बजे और शाम चार बजे हाजिरी रिपोर्ट भेजकर यह बताना होगा कि कितने कर्मचारी अनुपस्थित रहे, कितने डयूटी पर हैं और कितनों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। मुख्य सचिव ने विभागाध्यक्षों को भेजे पत्र में कहा है कि आठ जनवरी की हड़ताल को जायज नहीं ठहराया जा सकता।
राज्य कर्मचारी संघ व उससे जुड़े संगठन हड़ताल से दूर
हरियाणा राज्य कर्मचारी संघ व उससे संबंधित कर्मचारी संगठन हड़ताल में शामिल नहीं होंगे। संघ ने दावा किया है कि उनसे जुड़े परिवहन, बिजली, स्वास्थ्य, सिंचाई, जनस्वास्थ्य, पीडब्ल्यूडी, अधयापक संघ, शुगर मिल, मिड-डे मील, पैक्स, एनएचएम, अर्बन हेल्थ, शिक्षा विभाग, पशुपालन विभाग, चतुर्थ श्रेणी, लिपिक, मत्स्य, सिविल सचिवालय, निदेशालय चंडीगढ़ व पंचकूला सहित कर्मचारी संगठनों के कर्मचारी हड़ताल नही करेंगे।
राज्य कर्मचारी संघ के प्रदेश सयोजक कृष्ण लाल गुर्जर ने बताया कि वामपंथी संगठनों ने कुछ राजनीतिक दलों के साथ मिलकर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हड़ताल का एलान किया है। इसलिए हड़ताल में अनेक संगठन शामिल नहीं होंगे। किसी कर्मचारी के साथ हड़ताल को लेकर जोर जबरदस्ती की तो चुप नही बैठेंगे।
किसान संगठन पंजाब में बुधवार दोपहर एक से तीन बजे तक पूरे राज्य में सड़कों पर जाम लगाएंगे। वहीं, दो जगह रेल मार्ग भी जा करेंगे। सड़क जाम के दौरान सिर्फ विद्यार्थियों और अध्यापकों के वाहन और एंबुलेंस को ही जाने की इजाजत दी जाएगी। वाम दलों और मजदूर संगठनों ने आठ जनवरी को देशव्यापी हड़ताल बुलाई है।
उनका दावा है कि इसमें देश भर के करीब 25 करोड़ लोग हिस्सा लेंगे। पंजाब के दस किसान संगठनों ने भी इसमें शामिल होने का एलान किया है। जिनमें ज्यादा वामपंथी झुकाव वाले संगठन हैं। जिन्होंने ग्रामीण भारत बंद का एलान किया है। जिसमें गांवों से अनाज, दूध, सब्जी, चारा आदि बाहर नहीं जाने दिया जाएगा।
क्रांतिकारी किसान यूनियन के डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि मानसा और अमृतसर में दो घंटे के लिए रेल मार्ग जाम किया जाएगा। जबकि, सड़कों का चक्का जाम पूरे पंजाब में होगा। पटियाला और संगरूर में ही छह-छह जगह जाम की योजना है। उन्होंने दावा किया कि दो घंटे के लिए पंजाब की सड़कों पर आवाजाही पूरी तरह ठप की जाएगी। संगठनों ने बैठकों, फ्लैग मार्च आदि के जरिए पहले ही गांवों के लोगों को बता दिया है कि आठ जनवरी को गांवों से कोई सामान बाहर नहीं जाएगा। मिल्क प्लांट, डेयरी यूनियनों को जागरूक किया है।
बस ऑपरेटरों और मिनी बस ऑपरेटरों से कहा है कि वे गांवों में बसें न लेकर जाएं। गांवों के लोग इसमें सहयोग कर रहे हैं। लेकिन किसान संगठनों के सदस्य दोपहर 11 बजे तक गांवों के बाहर रह कर निगरानी करेंगे कि कोई सामान बाहर न जाए। उसके बाद चक्का जाम में शामिल होंगे। संगठनों का आंदोलन किसानों के मुद्दों पर आधारित है।