लुधियाना की मंडियों में अनाज की ढुलाई मामले में हजारों करोड़ का घोटाला सामने आने के बाद पंजाब सरकार की कैबिनेट शुक्रवार को नई अनाज लेबर नीति और संशोधित अनाज ट्रांसपोर्ट नीति को मंजूरी दे दी। इस फैसले के तहत अनाज ढोने वाले वाहनों पर अब वाहन ट्रैकिंग सिस्टम लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही अनाज ढुलाई के लिए श्रम और वाहनों की सेवाओं को पूरी तरह अलग-अलग कर दिया गया है, जिससे अब केवल एक ठेकेदार नहीं बल्कि मजदूर संगठन भी सीधे तौर पर टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा ले सकेंगे।
सरकार के मुताबिक इस नई नीति का उद्देश्य मौजूदा लेबर व कारटेज नीति को खत्म कर मजदूर संगठनों की व्यापक हिस्सेदारी को सुनिश्चित करना है। बीते कई दशकों से जारी मौजूदा लेबर व कारटेज नीति को ठेकेदारों की पक्षधर कहा जाता रहा है, क्योंकि इसमें एक ही व्यक्ति की ओर से लेबर व यातायात की सेवाएं प्रदान की जाती थी। उल्लेखनीय है कि लुधियाना में अनाज ढुलाई घोटाले में स्कूटर, कार आदि वाहनों के नंबरों वाली आरसी के आधार पर टेंडर हासिल कर अनाज की ढुलाई दिखा दी गई थी।
अब ट्रकों व मजदूरों का विवरण जरूरी नहीं
नई नीति के तहत टेंडर प्रक्रिया के दौरान दस्ती-दस्तावेजों को जमा करवाने की व्यवस्था को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है, क्योंकि क्योंकि कई टेंडर दस्तावेजों में त्रुटियों के कारण रद्द कर दिए जाते थे। ट्रकों के रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और मजदूरों के आधार नंबरों के विवरणों को जमा करवाने की जरूरत को भी खत्म कर दिया गया है।
टेंडर क्लस्टर का आकार 50000 टन पर सीमित
इस नीति ने टेंडर किए क्लस्टर का आकार 50 हजार टन तक सीमित कर दिया है। इसी कारण एक क्लस्टर में वाहनों और मजदूरों की जरूरत घटने की उम्मीद है। इससे पहले किसी क्लस्टर के आकार को निर्धारित करने के लिए कोई मापदंड नहीं था, जो कि कम से कम 5000 टन से लेकर अधिक से अधिक 2 लाख टन तक अलग-अलग आकार का होता है। दोनों नीतियों ने अब डिप्टी कमिश्नर को टेंडर कमेटी का चेयरमैन बना दिया है।