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कल लगेगा कंकण सूर्य ग्रहण

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चंडीगढ़। अमावस्या के दिन चांद जब सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य आ जाता है तो इस आकाशीय घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। इस स्थिति में जब चांद की छाया पूर्ण रूप से सूर्य को ढक लेती है तो यह पूर्णग्रास सूर्य ग्रहण कहलाता है। वहीं जब सूर्य की छाया चांद से बड़ी होती है और चांद की छाया सूर्य की छाया को पूरी तरह से ढक नहीं पाती तो इस अवस्था में सूर्य एक चांदी के चमकते कंकण अथवा वलय के आकर में दिखाई देता है जिसे वलयाकार अथवा कंकण सूर्य ग्रहण कहते हैं। यह बात सेक्टर-30 स्थित श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख पंडित बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कही।
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उन्होंने कहा कि यह कंकणाकृति सूर्यग्रहण रविवार के दिन घटित हो रहा है इसलिए यह चूड़ामणि सूर्य ग्रहण कहलाएगा। 21वीं सदी का कंकण चूड़ामणि सूर्य ग्रहण योग 80 साल के बाद बना है। 21 जून को लगने वाला वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण मिथुन राशि में प्रारंभ होकर आर्द्रा नक्षत्र में समाप्त होगा। ग्रहण का सूतक ग्रहण के समय से 12 घंटे पूर्व अर्थात बीस जून की रात दस बजे से शुरू होगा।
पं. मिश्र ने कहा कि यह कंकण सूर्यग्रहण मिथुन राशि में घटित होगा। इस समय सूर्य, चंद्रमा, बुध तथा राहु ग्रह मिथुन राशि में स्थित हैं। मिथुन राशि का नक्षत्र मृगशिरा आद्रा है। मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल, आद्रा नक्षत्र का स्वामी राहु है तथा मकर राशि में नीच बृहस्पति के साथ वक्री शनि का संबंध है। इसलिए यह ग्रहण अनिष्टकारी है। इसमें अतिवृष्टि, अनावृष्टि, महामारी का भयंकर प्रकोप, प्राकृतिक आपदा, तूफान एवं आंतरिक तथा बाहरी शत्रुओं का प्रकोप रहेगा।
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खंडग्रास के रूप में दिखेगा ग्रहण, सुबह 10.22 बजे शहर में शुरू होगा
तीन घंटे पच्चीस मिनट की अवधि के ग्रहण का प्रारंभ चंडीगढ़ में सुबह दस बजकर बाइस मिनट पर प्रारंभ होगा। इस सूर्य ग्रहण का मध्य दोपहर बारह बजकर बीस मिंट पर होगा। ग्रहण की समाप्ति दोपहर एक बजकर सैंतालीस मिनट पर होगा। यह कंकणाकृति सूर्यग्रहण चंडीगढ़ में खंडग्रास के रूप में दिखाई देगा।
ग्रहण के समय यह करें
ग्रहण के समय की जाने वाली गतिविधियों के बारे में बताते हुए पं. बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि शास्त्रों में चूड़ामणि ग्रहण में पवित्र नदियों गंगा, संगम, तीर्थक्षेत्र में स्नान, दान, जप आदि का बहुत अधिक महत्व बताया गया है। जब ग्रहण का प्रारंभ हो रहा हो तब स्नान करने के बाद जप करना चाहिए। मध्यकाल में हवन, देवपूजा, मंत्र साधना इत्यादि तथा ग्रहण की समाप्ति पर पुन: स्नान करने के पश्चात दान करना चाहिए।
ग्रहण के समय यह न करें
सेक्टर-18 के श्रीराधा कृष्ण मंदिर के पुजारी और देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष डॉ. लाल बहादुर दुबे ने कहा कि मूर्ति का स्पर्श नहीं करना चाहिए। भोजन नहीं करना चाहिए। वहीं ग्रहण काल के दौरान सोना भी नहीं चाहिए। इसके साथ ही गर्भवती स्त्री को सब्जी काटना निषेध है।
कोरोना के चलते घर में ही तीर्थ जल को पानी में मिलाकर स्नान करें
नृसिंह पीठाधीश्वर स्वामी रसिक महाराज का कहना है कि कोरोना के कारण सार्वजनिक परिवहन लगभग बंद है। ग्रहण के दौरान लोग तीर्थ स्थानों पर जाकर पवित्र नदियों में स्नान करते थे। इस बार कोरोना के चलते ऐसा करना संभव नहीं है। ऐसे में लोग घरों में ही पवित्र तीर्थ के जल को पानी में मिलाकर स्नान करें। ग्रहण समाप्ति के बाद वैसे तो पवित्र नंदी में स्नान करना चाहिए पर इस बार तालाब, कुएं या बावड़ी में स्नान करें। यह भी संभव न हो तो घर पर पानी में तीर्थ जल मिलाकर स्नान करें।
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