चंडीगढ़। वित्तीय संकट से उबरने के लिए निगम जनता की जेब पर ही बोझ डालेगा। इसका अंदाजा शुक्रवार को आयोजित मेयर की विशेष कमेटी के सुझावों से लग गया। कमेटी ने नई कार या प्रॉपर्टी खरीदने पर नगर निगम टैक्स लगाने का सुझाव दिया। वहीं टेबल-कुर्सी लगाने की पॉलिसी बनाकर होटल व ढाबा संचालकों से शुल्क लेने की बात कही। सामान्य रूप से जब टेबल-कुर्सी लगाने की पॉलिसी बनेगी तो फिर खाना भी महंगा होगा। इससे पता चलता है कि निगम लोगों की जेब पर बोझ डालने की तैयारी में है।
जानकारी के अनुसार फरवरी में कमिश्नर केके यादव ने कहा कि उनके पास विकास कार्यों का फंड नहीं है। इस पर मेयर राजबाला मलिक ने सात सदस्यीय कमेटी बनाकर निगम को रेवेन्यू बढ़ाने के सुझाव देने को कहा। कमेटी की पहली बैठक में ज्यादातर रेवेन्यू आने संबंधी रिपोर्ट मांगी गई थी। दूसरी बैठक में कुछ टैक्स व कुछ विभाग प्रशासन से निगम में लाने पर विचार करने की बात सामने आई।
तीसरी पार्टी से सर्वे कराने का सुझाव
कमेटी ने निगम को तीसरी पार्टी से सर्वे कराने के लिए कहा है। साथ ही अपना रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कम्पनी से सलाह लेने के लिए कहा है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब निगम को तीसरी पार्टी से ही सर्वे कराना था तो फिर यह कमेटी बनाने की आवश्यकता ही नहीं थी।
निगम ने बढ़ाया पानी बिल तो पार्षदों ने किया हंगामा
निगम पानी के बिलों में बढ़ोतरी का एजेंडा लेकर आया था। इस पर पार्षदों ने काफी हंगामा किया था। उनका कहना था कि किसी भी हाल में लोगों की जेब पर बोझ नहीं पड़ना चाहिए। अब लोग ऐसी परिस्थिति से गुजर रहे हैं, जहां उनके पास कमाई का बड़ा कोई जरिया नहीं है, इसलिए अभी लोगों की जेब पर बोझ डालना ठीक नहीं है।