सरकार बनने पर हम ये करेंगे, हम वो करेंगे। ऐसे बड़े-बड़े दावे हर पार्टी ने किए, लेकिन नए 'सरदार' का सामना सबसे पहले एक बहुत बड़ी चुनौती से होगा। इस बार पंजाब के विधानसभा चुनाव में सभी पार्टियों ने नशे के खात्मे को लेकर बड़े-बड़े दावे किए।
इसलिए सत्ता में आने वाली सरकार के लिए वादे पर खरा उतरने की चुनौती होगी। दिलचस्प है कि नवनिर्वाचित सरकार को पहला फैसला भी शराब पर ही लेना होगा, क्योंकि मार्च में ही नई एक्साइज पॉलिसी बनानी पड़ेगी। विधानसभा चुनाव के नतीजे 11 मार्च को आएंगे।
उसके बाद शपथ ग्रहण के साथ ही सरकार का गठन होगा। इसके बाद वित्तीय वर्ष खत्म होने में बहुत कम समय रह जाएगा। इसलिए नई सरकार को सबसे पहले एक्साइज पॉलिसी पर ही फैसला लेना होगा। पिछले साल की एक्साइज पॉलिसी विवादों में रही।
सरकार की सबसे ज्यादा किरकिरी एल-1-ए सुपर होलसेलर शराब लाइसेंस को लेकर हुई। एक शराब ठेकेदार की याचिका पर हाईकोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला दिया। बाद में सुप्रीम कोर्ट में सरकार की हार हुई।