फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

10 दिन में ऐसे बढ़ा बाबा रामपाल का 'बवंडर'?

Mon, 17 Nov 2014 04:42 PM IST
डिजिटल टीम/अमर उजाला, चंडीगढ़
विज्ञापन
विज्ञापन
5 नवंबर -
विज्ञापन

रामपाल की हाईकोर्ट में पेशी थी, लेकिन रामपाल हाईकोर्ट में पेश नहीं हुए। हाई कोर्ट ने सतलोक आश्रम के श्रद्धालुओं को पंचकूला में ही रोकने के आदेश दिए थे।

6 नवंबर -
सतलोक आश्रम के संचालक रामपाल और रामकुमार ढाका के खिलाफ पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने गैर जमानती वारंट जारी कर सोमवार तक कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए। हाईकोर्ट ने डीजीपी और गृह सचिव को वारंट को लागू करवाने और दोनों को गिरफ्तार करने के सख्त निर्देश दिए थे। हालांकि रामपाल का मेडिकल सर्टिफिकेट जारी करने वाले डॉ. हुड्डा अदालत में पेश हुए और उन्होंने रामपाल के अस्वस्थ होने की बात कही।
विज्ञापन


7 नवंबर -
रामपाल के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उनके बरवाला के पास स्थित सतलोक आश्रम में अनुयायी जुटने शुरू हो गए। इस दिन करीब आठ हजार अनुयायी आश्रम में पहुंचे। इसी दिन से आश्रम में तीन दिवसीय सत्संग शुरू हुआ। वहीं डीसी और एसपी इसी दिन चंडीगढ़ पहुंचे।

8 नवंबर -
हाईकोर्ट के आदेश के बाद हिसार में अर्धसैनिक बल तैनात हो गया। पुलिस की ओर से 10 अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियों के साथ विभिन्न जिलों से 35 कंपनियां हिसार बुलाई गईं। 10 पर्यवेक्षक नियुक्त किए गए। पुलिस ने बरवाला को चारों तरफ से नाकेबंदी कर सील कर दिया। उधर, इस दिन आश्रम में करीब 25000 अनुयायी इकट्ठा हो गए।

अनुयायी और ब्लैक कमांडों डटे आश्रम के बाहर

9 नवंबर
जिला प्रशासन ने रामपाल का री-मेडिकल करवाया। मेडिकल में उनके चलने-फिरने में अस्वस्थ होने की बात कही गई और उन्हें 72 घंटे के लिए चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। वहीं रामपाल के साथ-साथ दूसरे आरोपी राष्ट्रीय समाजसेवक समिति के मुखी रामकुमार ढाका को गिरफ्तार नहीं किया जा सका। इस दिन सैकड़ों महिलाएं, बच्चे और ब्लैक कमांडो आश्रम के गेट के बाहर तैनात रहे।

10 नवंबर -
पुलिस को संत रामपाल को हाईकोर्ट में पेश करना था लेकिन पुलिस रामपाल को कोर्ट में पेश नहीं कर सकी, जिस पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए सरकार को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकार चाहे तो बंकर से भी रामपाल को निकाल लाए। इसलिए अगली पेशी हर हालत में रामपाल को पेश किया जाए अथवा डीजीपी खुद पेश हों।  हाईकोर्ट ने डीजीपी व गृह सचिव को सोमवार तक संत रामपाल और रामकुमार ढाका को पेश करने के निर्देश दिए।

11 नवंबर -
सतलोक आश्रम की ओर से रामपाल के मुंह पर ऑक्सीजन लगाए फोटो और वीडियो जारी किया गया। इसके अलावा आश्रम के गेट पर बड़ी संख्या में अनुयायी डटे रहे। पुलिस कंपनियां और पैरामिलिट्री फोर्स के जवान भी बरवाला से वापस हिसार पहुंच गए। छह दिन बीत जाने के बाद भी इस दिन तक अनुयायी सर्द हवाओं के बीच आश्रम के आगे डटे रहे।

12 नवंबर -
पुलिस ने रामपाल के आश्रम की घेराबंदी शुरू कर दी। आश्रम के रास्तों पर पुलिस ने 15 जगह नाके लगाकर हर नाके पर 10-15 पुलिस कर्मी तैनात कर दिए। बरवाला और उकलाना में भी पुलिस फोर्स भेज दी गई। वहीं अनुयायियों ने इस दिन स्पष्ट चेतावनी दे डाली कि अब तो किसी भी हालत में संत को नहीं ले जाने देंगे।

दिल्ली घेरने की अनुयायियों की चेतावनी

13 नवंबर -
इस दिन रामपाल के अनुयायियों ने चेतावनी दी कि अगर उनके हक में फैसला नहीं आया तो 17 नवंबर को दिल्ली घेरेंगे और राष्ट्रपति आवास पहुंचकर न्याय दो या मौत दो का नारा बुलंद करेंगे। वहीं आश्रम कमेटी की ओर से सुप्रीम कोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया गया।

वहीं मामले से संबंधित रणनीति बनाने के लिए डीजीपी एसएन वशिष्ठ भी हिसार पहुंचे और पुलिस कर्मियों की बैठक ली। प्रशासन ने अस्पताल, अग्निशमन,  रोडवेज विभागों को साथ लेकर संत रामपाल पर शिकंजा कसने के लिए तैयारियों को मुस्तैद किया गया।

14 नवंबर -
सतलोक आश्रम के बाहर टकराव के आसार बढ़ गए। प्रशासन की ओर से आश्रम की बिजली-पानी काट दिया गया। रोडवेज की बसें, एंबुलेंस और जेसीबी मंगवाई गईं। साथ ही इस ओर के सभी रूट डायवर्ट कर दिए गए। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने आश्रम का हवाई सर्वे भी किया। दिल्ली से पैरामिलिट्री फोर्स भी मंगवाई गई। वहीं आश्रम के बाहर बैठे अनुयायियों ने किसी भी हालत में रामपाल को गिरफ्तार न होने देने का ऐलान किया। सुप्रीम कोर्ट ने भी संत रामपाल की अर्ली हियरिंग की याचिका को खारिज कर दिया।

15 नवंबर -
इस दिन पुलिस रामपाल के आश्रम को घेरकर और करीब पहुंच गई। आईजी अनिल राव ने 500 मीटर की दूरी से आश्रम का निरीक्षण किया। आसपास के शिक्षण संस्थानों की तीन दिन के लिए छुट्टी कर दी गई। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी इस दिन रामपाल से खुद ही अदालत में पेश होने की अपील की। उधर, मानव शृंखला बनाकर अनुयायियों ने आश्रम के बाहर डेरा डाल दिया और चार गुना निजी ब्लैक कमांडो ने छतों पर मोर्चा संभाला।

पैदा किया कुछ कर गुजरने का जोश

सीआरपीएफ के जवानों के आश्रम के आगे से लगातार गुजरने के बाद जहां आश्रम के अनुयायियों में हलचल पैदा हो गई थी। इसके कुछ देर बाद ही शमशेर खरकड़ा और सुरेंद्र पूनिया से प्रवक्त राजकपूर की बातचीत हुई।

जिसके विफल होने बाद अनुयायी बलवान सिंह ने पुलिस से सुरक्षित रखने के गुर सिखाए। आश्रम के अनुयायियों ने सतलोक आश्रम के मुख्य द्वार पर बैठी महिलाओं को महिला पुलिस का किस तरह से मुकाबला करना है, उसके गुर बताए।

पुलिस से बचने के ये तरीके सिखाए

1. आंसू गैस से कैसे बचें : पुलिस के हमला करने पर यदि आंसू गैस से हमला किया जाता है तो ऐसे में महिलाएं अपने कपड़ों को गीला कर लें। गैस निकलने पर कपड़ों से अपनी आंखें पोंछ लें और साथी की भी, जिससे आंसू गैस का असर नहीं होगा।

2. महिला पुलिस को दो महिलाएं करें काबू - महिलाओं को समझाते हुए माइक के माध्यम से बताया गया कि जब महिला पुलिस हमला करे तो उसके डंडे को पकड़े या उस महिला पुलिस कर्मी के दोनों हाथ पकड़ लें और उसे अपने काबू में ले लें। इसके अलावा सिर पर हमला होने पर आगे खड़ी महिला नीचे झुक जाए और पीछे खड़ी महिला डंडे को पकड़ लें।
विज्ञापन

हमला होने पर महिलाएं क्या करें

हमला होने पर यदि महिलाएं खड़ी होती हैं तो अपने साथी के साथ अपने हाथों को जोड़कर चैन बना लें, जिससे बाबा को लेने के लिए आई पुलिस आपको पार न कर सके। जबरदस्ती वह कुछ करना चाहे तो करने दें।

सतलोक जाना है तो मरना पडे़गा
बलवान सिंह ने संत के अनुयायियों को सतलोक जाने के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि परमात्मा सिर मांगता है और यह परमात्मा सिर नहीं मांगता है, लेकिन आपकी अपनी मर्जी है और अपनी प्रसन्नता से सिर चढ़ाना चाहे तो चढ़ा सकते हैं।

बाकी सब परमात्मा पर छोड़ दें। पुलिस अगर गोली चलाती है तो गोली पीठ पर न खाकर सीने पर खाएं। मरने के लिए तैयार हैं आप। सतलोक पर जाना है तो आपको मरना पडे़गा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें