चंडीगढ़। पंजाब के राज्यपाल व चंडीगढ़ के प्रशासक बनवारीलाल पुरोहित ने सोमवार को कंस्ट्रक्शन व डिमोलिशन वेस्ट मैनेजमेंट नीति-2021 को मंजूरी दे दी। उनके सलाहकार धर्मपाल के अनुसार मंगलवार को नीति की अधिसूचना जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने के बाद मकानों के अपशिष्टों का सही से निपटारा होगा।
सलाहकार धर्मपाल ने बताया कि इस नीति को लाने का मकसद है कि मकान को तोड़ने के बाद जो भी अपशिष्ट सामग्री बचती है, उसका 100 फीसदी निपटारा किया जाएगा। सामग्री को इधर उधर फेंकने की बजाय उसे रिसाइकल कर अन्य चीजों का निर्माण किया जाएगा। यह नीति आम नागरिकों, निजी ठेकेदार और सरकारी विभागों के लिए एक समान होगी। कई हफ्ते पहले नीति का प्रारूप तैयार कर लिया गया था, लेकिन प्रशासक के सलाहकार धर्मपाल ने इसमें कई बदलाव करने के सुझाव दिए थे, इसलिए नीति में संशोधन कर फिर से प्रशासक के सलाहकार के समक्ष रखा गया, जिसे उन्होंने मंजूर कर दिया।
सलाहकार ने कहा कि अभी तक जो लोग मकानों के अपशिष्ट को इधर-उधर फेंक देते थे, इस नीति के आने से उन पर लगाम लगेगी। नीति के अनुसार एक हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया जाएगा। नंबर पर कॉल कर लोग निगम की गाड़ी को मंगवा सकेंगे। हालांकि, इसमें लोगों को फायदा ये होगा कि उनकी तरफ से जो भी अपशिष्ट जैसे मकान निर्माण के बाद बची सामग्री ईंट, गिट्टी, रेत आदि निगम को देते हैं तो बदले में उन्हें 50 प्रतिशत रिसाइकल सामग्री का इंसेंटिव मिलेगा।
लोगों के सामने दो विकल्प, निगम को बेचें या खुद करें निपटारा
नीति के ड्राफ्ट के अनुसार पुराने मकान को तोड़कर नया मकान बनाते समय लोगों को दो विकल्प दिए जाएंगे। एक वह अपशिष्टों को नगर निगम को दे दें और दूसरा वह खुद निपटारा करें। बिल्डिंग प्लान अप्रूवल के साथ ही दोनों में एक विकल्प को चुनना होगा। अगर वह खुद निपटारे की बात को कबूल करते हैं तो बताना होगा कि वह कैसे और कहां अपशिष्टों का इस्तेमाल करेंगे। अगर वह निगम को देना चाहेंगे, तो उसके लिए लोगों को बिल्डिंग प्लान की मंजूरी के शुल्क के साथ इसके लिए एक अतिरिक्त शुल्क देना होगा।