स्वास्थ्य सचिव का डेपुटेशन रद्द करने का पत्र फाइलों में दफन
डेपुटेशन के प्रकरण को लेकर बाकायदा फरवरी 2022 में पूर्व स्वास्थ्य सचिव आईएएस यशपाल गर्ग ने पत्र जारी किया था। इस पत्र के मुताबिक खुद अधिकारी ने माना कि सामान्य तौर पर डेपुटेशन का नियम केवल तीन साल के लिए है, लेकिन इसे पांच साल तक के लिए बढ़ाया जा सकता है। कई कारणों के चलते इसे अधिकतम सात साल तक ही बढ़ाया जा सकता है। अधिकारी ने पत्र में माना कि चंडीगढ़ में इसका एक नेक्सस चल रहा है जिसे तोड़ने के लिए उन्होंने सालों से डेपुटेशन पर जमे डाॅक्टरों को तुरंत प्रभाव से रिलीव कर उन्हें वापस उनके राज्य में भेजने के लिए आदेश जारी किए थे। इसी दौरान अधिकारी का चंडीगढ़ से तबादला हो गया और नेक्सस चलाने वाले डाॅक्टरों ने इस पत्र को ही फाइलों में दबवा दिया ताकि उनकी डेपुटेशन पर कोई आंच न आए।
आंकड़ों ने खाेली डेपुटेशन के आंकड़ों की पोल
इस पूरे प्रकरण को लेकर जब शहर निवासी एक डाक्टर द्वारा ही आरटीआई लगाई गई तो उसके जवाब में आंकड़े चौंकाने वाले सामने आए। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 20 साल से अधिक डेपुटेशन वालों में चार डाॅक्टर, 15 से 20 साल वालों में 18 डाॅक्टर, 10 साल से 15 साल के बीच में 20 डाॅक्टर, 7 से 10 साल वालों में 30 डाॅक्टर, 5 से 7 साल वालों के बीच में 8 और 5 साल से कम वालों की संख्या करीब 32 डाक्टरों की है।
हरियाणा से डेपुटेशन पर आए सीनियर डाॅक्टर
अगर रिकॉर्ड पर ही नजर डालें तो हरियाणा से डाॅ. कुलबीर सिंह बल 9 जून 2009 को डेपुटेशन पर आए और आज तक यहीं जमे हुए हैं। इसके अलावा डाॅ. नीरज धवन 2004, डाॅ. मोनिका धीर 2004, डाॅ. अर्पणा शर्मा 2006, डाॅ. जया जेटली 2006, डाॅ. सभ्यता शर्मा 2006, डाॅ. हरलीन कौर 2007, डाॅ. विजय गिरधर 2008, डाॅ. अंजू वर्मा 2008, डाॅ. रंजना मेहता 2008, डाॅ. ऊषा कुमारी 2008, डाॅ. राणा सिंह 2008, डाॅ. कपिश गुप्ता 2012, डाॅ. मनीष चुग 2013, डाॅ. मनजीत सिंह 2013, डाॅ. दीक्षा मलिक 2014, डाॅ. श्वेता गुप्ता 2014 और डाॅ. मधु सभरवाल 2014 का नाम इसी सूची में शामिल है।
पंजाब से सबसे अधिक सिटी ब्यूटीफुल में जमे डाॅक्टर
हरियाणा की तर्ज पर पंजाब से आए वरिष्ठ डाॅक्टर भी डेपुटेशन पर लंबे समय से यहीं जमे हुए हैं और उनका अब चंडीगढ़ से मोह नहीं टूट रहा है। रिकाॅर्ड के मुताबिक नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों में डाॅ. चारू सिंगला 2003, डाॅ. वनित कौर 2003, डाॅ. रमिता कौर रंधावा ढिल्लों 2003, डाॅ. हरलीन रोहेवल 2003, डाॅ. हरबंत सिंह 2004, डाॅ. नीरज गुप्ता 2004, डाॅ. रूबि ओबरॉय 2004, डाॅ. अनिता मोहिंद्रू 2004, डाॅ. सरबजीत सिंह 2004, डाॅ. दिनेश गर्ग 2005, डाॅ. जागृति 2005, डाॅ. कृष्णा चौधरी 2006, डाॅ. बरिंद्रजीत कौर 2006, डाॅ. अमरजीत सिंह 2006 डाॅ. सपना मल्होत्रा 2007, डाॅ. संगीता अजय कुमार 2007, डाॅ. गुरमिंद्र सिंह बेदी 2008, डाॅ. कुलविंद्र कौर 2011, डाॅ. बृजलाल 2011, डाॅ. सिम्मी मल्होत्रा 2011, डाॅ. नवनीत कंवर 2011, डाॅ. रितू बस्सी 2011, डाॅ. गुलशन राय 2012, डाॅ. सुधा रानी 2012, डाॅ. उपासना ठाकुर 2012, डाॅ. हरनीत संधू 2012, डाॅ. सुवीर कुमार गुप्ता 2012, डाॅ. निशा साही 2012, डाॅ. सिमरत कौर 2012, डाॅ. आशावंत कौर 2012, डाॅ. अमनदीप सिंह संधू 2012, डाॅ. सुमित कालरा 2012, डाॅ. राजेश राणा 2012, डाॅ. दीपक बेरी 2012, डाॅ. परमजीत सिंह 2012, डाॅ. संदीप टंडन 2012, डाॅ. मनजीत पोल 2012, डाॅ. शशि किरण सिंह 2012, डाॅ. गुणचू कुंडी 2013, डाॅ. सिमरजीत कौर संधू 2014, डाॅ. सिमरत कौर 2012, डाॅ. जतिंद्र सिंह 2015, डाॅ. विवेक चोपड़ा 2016, डाॅ. राकेश कुमार 2017, डाॅ. रंजीत सिंह 2017, डाॅ. उपिंद्रजीत सिंह गिल 2017, डाॅ. संजीव बंसल 2017, डाॅ. चिरंजीव कौर 2017, डाॅ. मनमिंद्र सिंह व डाॅ. मरियालीन चलिया कौर 2017 से चंडीगढ़ में डेपुटेशन पर जमीं हुई हैं।