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दरिंदगी के बाद मासूम की हत्या करने वाले नाबालिग को तीन साल की सजा, और जुर्माना भी

Fri, 06 Jul 2018 04:53 PM IST
अमरीश शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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जेल
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अप्रैल 2015 में कालोनी नंबर-4 में दरिंदगी के बाद की गई पौने 4 साल की मासूम की हत्या के मामले में जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने नाबालिग दोषी को तीन साल (अधिकतम कारावास) की सजा सुनाई है। अदालत ने उसे अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में दोषी पाया है। हालांकि जुवेनाइल बोर्ड ने दोषी को अपील के लिए एक महीने का वक्त देते हुए फिलहाल जमानत दे दी है। अगर वह तय समय में सजा के खिलाफ ऊपरी अदालत में अपील नहीं करता है तो उसे बाल सुधार गृह भेज दिया जाएगा।
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इससे पहले इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने वर्तमान में मौलीजागरां निवासी नाबालिग के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 363, 376, 201 और पॉक्सो एक्ट 5 व 6 के तहत केस दर्ज किया था। वहीं अदालत ने दोषी पर 200 रुपये जुर्माना भी लगाया है। मामले के अनुसार 10 अप्रैल 2015 की रात 9 बजे घर के बाहर खेल रही पौने चार साल की बच्ची लापता हो गई थी। परिजनों ने आधे घंटे के भीतर इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस को सूचना दे दी। बच्ची के परिजन और लोग गिड़गिड़ाते रहे कि पास के जंगल में सर्च अभियान चलाए लेकिन पुलिस ने उन्हें टरकाकर भेज दिया।

वहीं लोगों ने गुहार लगाई कि पुलिस उन्हें टार्च दे दे तो वह खुद जंगल में जाकर उसे ढूंढ लेंगे। आरोप के अनुसार उस समय पुलिस ने इससे भी इंकार कर दिया था। इसके बाद बच्ची के परिजनों और लोगों ने बिना पुलिस के खुद ही पास के जंगल में सर्च अभियान चलाया। सुबह छह बजे सीटीयू वर्कशाप के पास जंगल के नाले में बच्ची की लाश मिली थी। बच्ची का सिर दलदल में धंसा हुआ था। प्रथम दृष्टया रेप के बाद बच्ची की हत्या किया जाना सामने आया था। इस मामले में पुलिस की लापरवाही को लेकर लोगों में खासी नाराजगी थी। इसे लेकर पुलिस और लोगों में पथराव हुआ और जमकर बवाल हुआ था।
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इसमें कई लोग चोटिल भी हुए थे। वारदात के 48 घंटे बाद पुलिस ने इस मामले में बच्ची के घर के पास ही रहने वाले नाबालिग को पकड़ केस सुलझाने का दावा किया था। इसके बाद पुलिस ने उसे जुवेनाइल होम भेज दिया था। पुलिस ने उसके खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, हत्या, सबूत मिटाने समेत पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत केस दर्ज किया था। पुलिस दावे के अनुसार नाबालिग आरोपी ने मृतका के पिता से रंजिश के कारण उसकी बच्ची का अपहरण किया था। इसके बाद उसने उससे दुराचार कर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी थी।

पायल से हुई थी शव की शिनाख्त
बच्ची का शव नाले में सिर के बल दलदल में धंसा था। एक पैर ऊपर उठा था। उसकी पायल देखते ही परिजनों ने पहचान कर ली। हालांकि शव वहां से छह घंटे बाद निकाला गया था। 

यह हुआ था उस रात
बच्ची के पिता एक मॉल में हाउसकीपर थे। पत्नी और पौने चार साल की इकलौती बच्ची के साथ कलोनी नंबर चार में रहते थे। वारदात वाले दिन वह काम पर गए थे और रात नौ बजे बच्ची घर के बाहर खेल रही थी। दस मिनट बाद बच्ची की मां बाहर आई तो देखा बच्ची गुम थी। इस पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की तो पड़ोस की महिला ने बताया कि कुछ देर पहले बच्ची को कोई व्यक्ति कुछ खिला रहा था। इसके बाद परिजन घबरा गए और रात साढ़े 9 बजे पुलिस को बच्ची के अगवा होने की सूचना देने इंडस्ट्रियल एरिया थाना पहुंचे। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने शिकायत सुनने के बाद कहा था कि ‘तुम जाओ पुलिस अपनी कार्रवाई करेगी’। एसएचओ के बारे में पूछने पर पुलिसकर्मियों ने बताया था कि वह घर खाना खाने गए हैं, जबकि पिता का आरोप था कि एसएचओ देवेंदर शर्मा थाने में ही एक कमरे में आराम कर रहे थे।
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