तीन साल पुराने रिश्वत के एक मामले में मनीमाजरा थाने की पूर्व एसएचओ जसविंदर कौर को राहत मिल गई है। चंडीगढ़ पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई अदालत ने जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने से मना कर दिया है।
अदालत ने कहा कि इस मामले के सक्षम प्राधिकारी ने जसविंदर के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी देने से मना किया है। ऐसी स्थिति में अदालत मामले में संज्ञान नहीं ले सकती। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि चंडीगढ़ डीआईजी की रिपोर्ट के खिलाफ सीबीआई और शिकायतकर्ता ऊपर की अदालत में जाने के लिए स्वतंत्र हैं।
जसविंदर कौर के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अदालत ने चंडीगढ़ पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी। इस संबंध में मंगलवार को चंडीगढ़ पुलिस ने अदालत में अपनी रिपोर्ट दी और कहा कि जसविंदर के खिलाफ कोई सुबूत नहीं है। सीबीआई की ओर से दिए गए रिकार्ड, रिकॉर्डिंग और चार्जशीट को बारीकी से जांचने-परखने के बाद पाया कि मोहन सिंह ने कहीं भी यह बयान नहीं दिया है कि उसने जसविंदर कौर के कहने पर रिश्वत के पैसे लिए थे।
इस संबंध में न ही मौखिक सुबूत हैं और न ही लिखित में। बुधवार को सुनवाई के दौरान सीबीआई के एडवोकेट केपी सिंह ने कहा कि जसविंदर कौर को बरी और दोषी साबित करने के लिए ठोस सबूत हैं या नहीं, यह तय करने की ड्यूटी डीआईजी की नहीं बल्कि अदालत की है। उन्होंने कहा कि नए तथ्य का कोई सवाल नहीं उठता, क्योंकि सक्षम प्राधिकारी को पहली बार मामले पर विचार करने के लिए आदेश दिया गया है।
शिकायतकर्ता ने अदालत में बयान दिया था कि जसविंदर कौर और मोहन सिंह ने आमने-सामने बैठकर उनसे रिश्वत की मांग की थी। चंडीगढ़ पुलिस के सक्षम प्राधिकारी ने शिकायतकर्ता और मोहन सिंह की मुलाकात की सीसीटीवी फुटेज पर भी ध्यान नहीं दिया है।