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नौ साल में तीन हजार लोगों के लीवर खराब, पुरुषों में समस्या अधिक, वजह भी जान लीजिए

Mon, 04 Nov 2019 03:56 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रोहतक (हरियाणा)
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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जित दूध दही का खाणा, देसां म्ह देश हरियाणा की कहावत पर पीजीआईएमएस रोहतक के गेस्ट्रो एंट्रोलॉजी विभाग का आंकड़ा प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है। ऐसा इसलिए कि वर्ष 2010 से लेकर 2019 के आंकड़ों पर अगर गौर करें तो तीन हजार मरीजों का लीवर जांच के दौरान खराब मिला है।

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इसकी मुख्य वजह जांच में मिले ये तीन कारण शराब, मोटापा व काला पीलिया रहे हैं। विभागाध्यक्ष एवं सीनियर प्रोफेसर डॉ. प्रवीण मल्होत्रा द्वारा उपलब्ध करवाए गए आंकड़ों में 40 से 60 वर्ष के अधिकांश पुरुष मिले हैं।

डॉ. मल्होत्रा के अनुसार यदि किसी मरीज को पीलिया, पेट में पानी एवं पांव में सूजन होना, खून की उल्टी या शौच के साथ खून आना, खून की कमी एवं कमजोरी तथा प्लेटलेट्स कम हैं तो उसे लीवर की भी समस्या है। बहुत सारे मरीजों में प्लेटलेट्स की कमी मिलती है और काफी समय तक वो मलेरिया अथवा डेंगू का इलाज करवाता रहता है, परंतु अंत में कई मरीजों में यह लीवर की समस्या पाई जाती है। 

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लीवर की बीमारी से बचने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है कि शराब तथा अन्य किसी नशे का प्रयोग न करें, पौष्टिक आहार लें, स्वच्छता का ख्याल रखें, नियमित व्यायाम, घी अथवा चिकनाई तथा मीठे का परहेज कर अपना वजन सामान्य रखें।

शुगर तथा थायराइड की समस्या होने पर उसका नियमित इलाज करें। काले पीलिया का पता लगने पर जिले के अस्पताल तथा पीजीआईएमएस रोहतक में मुफ्त जांच तथा इलाज करवाएं। सरकार द्वारा हेपेटाइटिस सी का इलाज निशुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है।

हेपेटाइटिस सी की तरह बी का भी होगा देश में निशुल्क उपचार
प्रदेश सरकार की हेपेटाइटिस सी को लेकर चलाई गई जीवन रेखा योजना की कामयाबी के बाद अब देश भर में हेपेटाइटिस बी के मरीजों को भी निशुल्क उपचार उपलब्ध होने वाला है।

इससे देश भर के लाखों मरीजों को समय पर उपचार मिलेगा। जिससे उनकी असमय मृत्यु को टाला जा सकेगा। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस का गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग देश के चुनिंदा मॉडल ट्रीटमेंट सेंटरों में से एक है। 

यहां उपचार व जांच निशुल्क उपलब्ध है। यहां आने वाले मरीज को एंडोस्कॉपी, क्लोनोस्कॉपी, फाइब्रोस्कैन, कैप्सूल एंडोस्कॉपी आदि निशुल्क दी जाती है। लाला श्याम लाल सुपर स्पेशयलिटी सेंटर में संचालित हो रहा गेस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग अब तक 33 हजार एंडोस्कॉपी, 14 हजार फाइब्रोस्कैन पिछले नौ सालों में बगैर किसी प्रतीक्षा के निशुल्क कर चुका है।
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