‘फानूस बनकर जिसकी हिफाजत हवा करे, वो चिराग क्या बुझे जिन्हें रोशन खुदा करें’। गांव तेपला के लांस नायक विक्रमजीत सिंह दुश्मनों से लोहा लेते हुए भले ही शहीद हो गए, लेकिन लोगों के जेहन में वे हमेशा के लिए अमर हो गए हैं। कल तक गांव की गलियों में खेलने कूदने वाले विक्रमजीत सिंह को उनके दोस्त ‘सोनी’ कहकर पुकारते थे। आज उनकी शहादत पर दोस्तों आंखों में आंसू नहीं, बल्कि फक्र है।
अदम्य पराक्रम एवं शौर्य की यह गाथा स्वर्णिम अक्षरों में आने वाले पीढ़ियों को प्रेरित करेगी। जिले में तेपला एकमात्र ऐसा गांव है जहां से अब तक तीन बहादुर सपूतों ने दुश्मनों से लोहा लेते हुए शहादत हासिल की। गांव में ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य सेना में है।
पथराई पिता की आंखें, पर नहीं टपके आंसू
शहीद के घर के बाहर जुटे ग्रामीण
विक्रमजीत सिंह की शहादत का समाचार मिलते ही घर के आंगन में लोगों का तांता लग गया। गांव के बड़े बुजुर्ग शहीद के परिवार को सांत्वना देने के लिए पहुंचे, मगर विक्रमजीत सिंह के पिता बलजीत सिंह की आंखें पथराई हुई थीं। बेटे की शहादत का उन्हें फक्र था, वह बोले कि ‘देश के लिए लड़ता हुआ मेरा बेटा चला गया, उसकी शहादत पर मुझे गर्व है।’ उन्होंने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही विक्रमजीत सेना में भर्ती होने की जिद्द करता था, वह अपने दादा से प्रेरित था।
सोमवार को पत्नी से की एक घंटे तक बात
शहीद विक्रमजीत सिंह की पत्नी हरप्रीत कौर ने बताया कि सोमवार को करीब एक घंटे तक फोन पर उनकी विक्रमजीत से बात हुई। वह अपनी यूनिट की बात करते रहे तो कभी आगामी दिनों में घर आने की। इस दौरान विक्रमजीत ने परिवार के सभी सदस्यों का हाल-चाल पूछा। सुबह बुरी खबर आई। विक्रम की मां कमलेश कौर का रो-रोकर बुरा हाल है।
दोस्त बोले- यारों का यार था सोनी
शहीद के दोस्त
लांस नायक विक्रमजीत सिंह के दोस्त सुखविंद्र सिंह, नरेंद्र सिंह, किरपाल सिंह ने बताया कि विक्रमजीत उर्फ सोनी यारों का यार था। अक्सर उनकी बात होती तो वह वीरता की बातें करता था। देशभक्ति कूट-कूट कर भरी थी। देश की रक्षा के लिए उसने प्राणों को न्यौछावर कर इसे साबित किया। उन्होंने बताया कि विक्रम को सेना में भर्ती होने का जज्बा था। यही वजह है कि वह अंबाला स्थित सेना भर्ती कार्यालय से कई किलोमीटर दूर रोहतक में सेना भर्ती रैली में पहुंच गया था। वहीं से उसने सेना को ज्वाइन किया।
कश्मीर की वादियों में खो गया तेपला का तीसरा सपूत
गांव तेपला से विक्रमजीत सिंह तीसरे सैनिक है जो जम्मू-कश्मीर में दुश्मनों से लोहा लेते शहीद हुए हैं। वर्ष 1999 में आपरेशन रक्षक के दौरान कारगिल में तेपला गांव के 30 वर्षीय मेजर गुरप्रीत सिंह शहीद हो गए थे। लांस नायक हरजिंद्र सिंह आठ जुलाई 2005 में जम्मू-कश्मीर में शहीद हुए थे। 13 सिख रेजिमेंट के हरजिंद्र सिंह भी आपरेशन रक्षक के दौरान शहीद हुए थे।
ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य फौज में
शहीद विक्रमजीत सिंह का घर
तेपला गांव की महिला सरपंच सुमनीत कौर बताती हैं कि गांव के निवासियों में देशभक्ति कूट-कूट कर भरी है। ढाई सौ से अधिक परिवारों का एक सदस्य सेना में है। शहीद विक्रमजीत सिंह की शहादत पर गांव को गर्व है। विक्रम ने देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगाई और अब देश को उसके परिवार की देखभाल करनी है। उन्होंने कहा कि सरकार शहीद के परिवार की मदद को आगे आए और हर संभव मदद करे।
एडीसी और एसडीएम ने दी परिवार को सांत्वना
उधर, शाम को प्रशासन की ओर से एडीसी कैप्टन शक्ति सिंह और एसडीएम सुभाष चंद्र सिहाग ने शहीद के घर जाकर परिजनों को सांत्वना दी। अधिकारियों ने शहीद के पार्थिव शरीर को लाने के लिए सेना अधिकारियों के साथ तालमेल स्थापित किया और सेना अधिकारियों के मुताबिक विक्रमजीत सिंह का पार्थिव शरीर बुधवार को गांव तेपला आएगा। अंबाला एयरफोर्स स्टेशन पर शहीद का पार्थिव शरीर लाया जाएगा।
विक्रमजीत की शहादत पर सीएम मनोहर लाल, स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज, राज्य मंत्री नायब सिंह सैनी, सांसद रत्न लाल कटारिया, विधायक संतोष चौहान सारवान, विधायक असीम गोयल आदि ने दुख जताया है।