चंडीगढ़। सेक्टर-37 में करोड़ों की कोठी पर कब्जा करने के मामले में तत्कालीन असिस्टेंट एस्टेट ऑफिसर एचसीएस मनोज खत्री, उनके तत्कालीन निजी सचिव राजिंदर मल्होत्रा और डीलिंग क्लर्क सुभाष बुधवार को एसआईटी के सामने पेश हुए। इस दौरान उनसे प्रॉपर्टी की फाइलों में गड़बड़ी के बारे में कई घंटे तक पूछताछ हुई। सूत्रों के अनुसार, इन लोगों ने कहा है कि एस्टेट ऑफिस की फाइलें ऑनलाइन हैं, ऐसे में गड़बड़ी कैसे की जा सकती है। साथ ही आरोपों को निराधार बताया। एसआईटी अब बयानों की जांच में जुट गई है। पुलिस के मुताबिक, जरूरत पड़ने पर इन अधिकारियों को पूछताछ के लिए दोबारा बुलाया जा सकता है।
एसआईटी अब इस मामले में एस्टेट ऑफिस के अन्य अधिकारियों से पूछताछ कर सकती है। वहीं, पुलिस ने एएसआई परमिंदर सिंह को बुधवार को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन अब उसे शुक्रवार को एसआईटी के सामने पेश होने को कहा गया है। एएसआई पर आरोप है कि वह भी इस साजिश में शामिल था। उसके सामने ही सेक्टर-37 के केमिस्ट शॉप मालिक अमित गुप्ता को प्रताड़ित किया गया था, लेकिन परमिंदर जांच करने के बजाय सेक्टर 39 के तत्कालीन थाना प्रभारी राजदीप सिंह का साथ देता रहा। बयान के बाद विशेष जांच टीम मामले में परमिंदर सिंह की भूमिका की जांच करेगी।
बता दें कि इस मामले में अब तक संजीव महाजन, डीएसपी रामगोपाल के भाई सतपाल डागर, कोठी खरीदने वाले आरोपी सौरव गुप्ता का भाई मनीष गुप्ता और इंस्पेक्टर राजदीप सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। मामले में शराब कारोबारी अरविंद सिंगला, खलिंदर सिंह कादियान, सौरव गुप्ता, अशोक अरोड़ा, शेखर व दलजीत सिंह फरार चल रहे हैं। वहीं, नकली राहुल मेहता को भी पुलिस अब तक नहीं पकड़ सकी है