राव इंद्रजीत सिंह (फाइल फोटो)
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वह स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने के बजाए अपने मंत्रालय के कैबिनेट मंत्री को ही हर फाइल भेजेंगे। राव इंद्रजीत को मिले मंत्रालयों का जनता के साथ सीधा कोई जुड़ाव नहीं है। हालांकि, गुर्जर व कटारिया के पास जनता से जुड़े हुए महकमे हैं। वे सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में बुजुर्गों व जरूरतमंद लोगों के लिए काम कर सकते हैं।
चूंकि, सामाजिक पेंशन, तेजाब पीड़ित, दिव्यांगों इत्यादि के मामले उनके विभाग के अंतर्गत ही आते हैं। कटारिया के पास जल शक्ति में प्रदेश के लिए नई योजनाएं लाने का मौका रहेगा। वह पेयजल व इससे जुड़ी अन्य परियोजनाएं लाकर प्रदेश की पेयजल आपूर्ति को सुदृढ़ करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
हरियाणा को इस बार भी कैबिनेट मंत्री मिलने की आस थी। मगर, यह सौगात मिल नहीं पाई। मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में बीरेंद्र चौधरी ने राज्यसभा सांसद होने के बावजूद इस्पात मंत्रालय को बतौर कैबिनेट मंत्री संभाला। अबकी उम्मीद जताई जा रही थी कि राव इंद्रजीत का प्रमोशन कर उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया जा सकता है।
विधानसभा चुनाव से पहले तीनों मंत्रियों को दिखानी होगी परफार्मेंस
हरियाणा में इसी साल अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रदेश के दस सांसदों में से तीन को मंत्री पद मिला है। चुनाव से पहले तीनों सांसदों को बेहतर परफार्मेंस देनी होगी ताकि वे अपने संसदीय क्षेत्रों के अलावा अपने प्रभावी वाली अन्य सीटों पर भी भाजपा को जीत दिला सकें।