चंडीगढ़। बुड़ैल जेल में गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के करीबी शूटर रविंद्र उर्फ काली राजपूत व राजन भट्टी समेत तीन कुख्यात अपराधियों से बैरक नंबर-10 में तीन मोबाइल बरामद होने से सनसनी फैल गई। इनमें से दो की-पैड वाले जबकि एक स्मार्ट फोन है। साथ ही एक सिम भी बरामद हुआ है। जेल सुपरिंटेंडेंट की शिकायत पर सेक्टर-49 थाना पुलिस ने जेल में मोबाइल बरामद होने पर मामला दर्ज किया है। जेल प्रशासन के इतने पुख्ता सुरक्षा इंतजाम के बावजूद किसकी मिलीभगत से तीन मोबाइल फोन बैरक तक पहुंचे, पुलिस इसका पता लगाने में जुट गई है।
जानकारी के अनुसार, शनिवार रात बुड़ैल जेल की स्पेशल टीम कैदियों की चेकिंग कर रही थी। इस दौरान जेल के बैरक नंबर-10 में बंद तीन कुख्यात अपराधियों रविंद्र उर्फ काली राजपूत, राजन भट्टी और प्रदीप सिंह के पास से तीन मोबाइल फोन बरामद हुए। टीम ने जांच में पाया कि इनमें से दो मोबाइल की-पैड वाले जबकि एक स्मार्ट मोबाइल है। इनमें एक मोबाइल में सिम भी लगा हुआ था। बैरक की अच्छी तरह से तलाशी लेकर टीम ने मामले की सूचना आला अधिकारियों को दी। इसके बाद जेल प्रशासन ने तीनों मोबाइल को कब्जे में लेकर सेक्टर-49 थाना पुलिस को सूचित किया।
शिकायत के आधार पर सेक्टर-49 थाना प्रभारी सुरिंदर सिंह की देखरेख में पुलिस टीम ने मामले की छानबीन शुरू कर दी है। पुलिस की मानें तो शूटर काली गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई का करीबी है। काली पर पंजाब, राजस्थान के अलावा चंडीगढ़ में दर्जनों लूट, अपहरण, फिरौती, हत्या, हत्या का प्रयास समेत दर्जनों मामले दर्ज हैं और वह वर्ष 2018 से चंडीगढ़ के बुड़ैल जेल में बंद है। वहीं, राजन भट्टी पर पंजाब समेत चंडीगढ़ में डकैती, अपहरण, हत्या, आर्म्स एक्ट के करीब 15 मामले दर्ज हैं। वह मई वर्ष 2015 में दुष्कर्म के आरोप में जिला अदालत में पेशी के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। इस बीच उसने चंडीगढ़ के एक डीएसपी पर गोलियां भी बरसाईं। वर्ष 2016 में ऑपरेशन सेल ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। जबकि प्रदीप सिंह पर चंडीगढ़ और पंजाब में हत्या, गैंबलिंग, डकैती, दंगा समेत अन्य कई मामले दर्ज हैं। जनवरी 2020 से वह बुड़ैल जेल में सजा काट रहा है।
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जेल कर्मचारी की मिलीभगत की आशंका
एक ही बैरक में तीन मोबाइल मिलने पर जेल प्रशासन हरकत में आ गया है। साथ ही पुलिस मोबाइल को कब्जे में लेकर यह पता लगाने में जुट गई है कि तीनों मोबाइल कितने दिनों से चालू हैं। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को आशंका है कि किसी जेलकर्मी की मिलीभगत से मोबाइल अपराधियों तक पहुंचे हैं। बैरक के आसपास ड्यूटी देने वाले मुलाजिमों समेत अन्य से पूछताछ भी शुरू कर दी गई है। हालांकि घटना के 24 घंटे के बाद भी पुलिस यह पता लगाने में नाकाम रही है कि जेल बैरक में मोबाइल कैसे और किसने पहुंचाए।
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हफ्ते में तीन दिन होती है चेकिंग, फिर बैरक में कैसे पहुंचे मोबाइल फोन
जेल प्रशासन का दावा है कि जेलों की लगातार चेकिंग करने के लिए एक स्पेशल टीम गठित की गई है। यह टीम हफ्ते में तीन दिन शुक्रवार, शनिवार और रविवार को जेल के बैरकों को अच्छी तरह चेक करने के अलावा कैदियों की भी जांच करती है, जोकि बीते सप्ताह भी हुई थी। लेकिन उस समय अपराधियों के पास से ऐसा कुछ नहीं मिला था। ऐसे में जेल प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि हो सकता है कि किसी नए कैदी या फिर किसी की मिलीभगत से अपराधियों तक मोबाइल पहुंचाए गए हों।
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बैरक-10 में पहले भी मिल चुके हैं मोबाइल
बता दें कि जून वर्ष 2018 में सर्च के दौरान बैरक नंबर-10 से अपराधी राजन भट्टी के पास से तीन मोबाइल मिले थे। उस दौरान भी दो की-पैड वाले और एक स्मार्ट मोबाइल मिला था। मामले में सेक्टर-49 थाना पुलिस ने डीडीआर दर्ज किया था लेकिन दोबारा इसी बैरक से तीन मोबाइल मिलने पर जेल प्रशासन पर सवालिया निशान खड़े हो गए कि आखिरकार इन अपराधियों तक मोबाइल किनकी मिलीभगत से पहुंच रहा है।
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टीम चेकिंग के दौरान बैरक नंबर-10 से तीन अपराधियों के पास से कुल तीन मोबाइल बरामद हुए हैं। मामले में सेक्टर-49 थाना पुलिस को सूचित कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई पुलिस कर रही है।
-विराट, एआईजी, बुड़ैल जेल