वर्क परमिट दिलाने के नाम पर टूरिस्ट वीजा पर भेजे गए पंजाब के तीन नौजवानों को मलयेशिया के इमीग्रेशन अधिकारियों ने पकड़ कर जेल में बंद कर दिया है। पंजाब के यह नौजवान मलयेशिया की माचोकंबो कैंप जेल में नर्क भरा जीवन जीने के लिए मजबूर हैं। मलयेशिया के कानून के मुताबिक नौजवानों को भारी जुर्माना और पांच साल तक जेल की सजा हो सकती है।
भविष्य को खराब होता देख नौजवान गुरचरण सिंह निवासी तलवंडी रोड रायकोट के पिता हरपाल सिंह और दविंदर सिंह निवासी रायकोट के पिता भूपिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री जय शंकर और मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के अलावा विदेशी जेलों में बंद भारतीयों की हमेशा करने वाले सरबत का भला ट्रस्ट के चेयरमैन डॉ. सुरिंदरपाल सिंह ओबराय को मदद की गुहार लगाई है।
नौजवानों के परिजनों ने बताया कि एजेंट ने एक लाख दस हजार रुपये प्रति व्यक्ति देकर मलयेशिया में अच्छी जगह नौकरी, रहने सहित वर्क परमिट दिलाने का वादा किया था। एजेंट की बातों में आकर उन्होंने सारे पैसे दे दिए। एजेंट ने बच्चों को दिसंबर 2019 में वर्क परमिट की जगह पर टूरिस्ट वीजा पर मलयेशिया भेज दिया। वहां वीजा खत्म होने के बाद मलेशिया की इमीग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें काबू कर जेल में बंद कर दिया।
इन युवकों के परिजनों ने बताया कि पहले ही कर्ज लेकर बच्चों को मलयेशिया भेजा था। अब उन्हें वापस लाने के लिए न ही उनके पास पैसे है और न ही राजनीतिक पहुंच। पीड़ितों ने जल्द से जल्द मलयेशिया की जेल में अपने बच्चों को छुड़वाने और भारत वापिस लाने की गुहार लगाई। इसके अलावा फिल्लौर के बंसिया चक्क निवासी कुलवंत सिंह ने बताया कि उन्होंने बेटे कुलविंदर सिंह को दिसंबर 2019 में एजेंट ने धोखे से मलयेशिया में टूरिस्ट वीजे पर भेज दिया। वह भी जेल में बंद है। उसकी भी रिहाई कराकर वापस लाया जाए।